Warud Farmers Protest: वरुड तहसील में 30 और 31 मई को आए तेज आंधी, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से संतरा एवं मौसंबी उत्पादक किसानों को भारी नुकसान हुआ है। फलों के बड़े पैमाने पर झड़ने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसी मांग को लेकर किसान न्याय हक्क संघर्ष समिति एवं किसानों ने तहसीलदार कार्यालय में धरना आंदोलन किया। किसानों ने वरूड तहसील को तत्काल ओलावृष्टि क्षेत्र घोषित कर प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने की मांग की है।
धरना आंदोलन के दौरान तहसीलदार को सौंपे गए ज्ञापन में किसानों का कहना है कि पहले अप्रैल और मई माह में 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तापमान के कारण फलों का भारी नुकसान हुआ और अब ओलावृष्टि से बचे हुए फलों की भी बड़े पैमाने पर गिरावट हो गई है।
वही बागानों पर भारी खर्च करने के बावजूद अब उनके पास अगली फसल के लिए संसाधन नहीं बचे हैं। तहसीलदार ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनका निवेदन राज्य सरकार एवं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक पहुंचाया जाएगा तथा नुकसान भरपाई दिलाने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।
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समिति ने चेतावनी दी कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। आंदोलन में कृषि उत्पन्न बाजार समिति के सभापति नरेंद्र बबलू पावडे, उपसभापति बाबाराव मांगुलकर, सुधाकरराव दोड, गणेश खरडे, धनंजय बोकडे, स्वप्नील खांडेकर, राजेश डवरे, देवेंद्र शेडके, चंद्रकांत बोंडनासे, हिराकांत उईके सहित बड़ी संख्या में किसान एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।