Amravati Municipal Election 2026 Updates: महाराष्ट्र के अमरावती जिले में राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। आगामी 15 जनवरी को होने वाले महानगरपालिका (मनपा) चुनाव के लिए रणभेरी बज चुकी है। इस बार का चुनाव न केवल उम्मीदवारों की संख्या के कारण, बल्कि पार्टियों के भीतर मची उठापटक और बगावत के चलते बेहद रोमांचक मोड़ पर खड़ा है। कुल 944 वैध उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनका भविष्य अमरावती के 6.77 लाख मतदाता तय करेंगे।
अमरावती मनपा में महिला और पुरुष वोटर्स में कड़ी टक्कर इस चुनाव में मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका निभाने वाली है। आंकड़ों के अनुसार, कुल 6,77,180 मतदाता इस लोकतांत्रिक उत्सव का हिस्सा बनेंगे। खास बात यह है कि महिला और पुरुष मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है, जिससे महिला वोट बैंक किसी भी दल की जीत का समीकरण बदल सकता है।
चुनाव प्रक्रिया के तहत 31 दिसंबर को नामांकन पत्रों की बारीकी से जांच की गई। कुल 958 नामांकनों में से 14 आवेदन तकनीकी खामियों के कारण रद्द कर दिए गए। फिलहाल मैदान में 944 उम्मीदवार डटे हुए हैं। शुक्रवार को नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा निर्धारित है, जिसके बाद स्पष्ट हो जाएगा कि वास्तविक मुकाबला किन दिग्गजों के बीच है। कई राजनीतिक दलों में टिकट वितरण को लेकर असंतोष देखा जा रहा है, जिससे निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या में इजाफा हुआ है।
87 सीटों पर शक्ति प्रदर्शन अमरावती मनपा की 87 सीटों के लिए होने वाली यह लड़ाई विभिन्न वर्गों के आरक्षण के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित आरक्षण के अनुसार सीटों का बंटवारा इस प्रकार है:
कहीं प्रत्याशियों की भीड़, कहीं निर्दलीयों का सूखा इस बार कुछ प्रभागों में उम्मीदवारों की इतनी भीड़ है कि मुकाबला 'मल्टी-कॉर्नर' हो गया है। प्रभाग क्रमांक 22 इस मामले में सबसे ऊपर है, जहां 56 प्रत्याशी आमने-सामने हैं। वहीं, प्रभाग 3, 10 और 11 में भी 49-49 उम्मीदवारों ने ताल ठोक दी है। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ प्रभाग 4 और 17 में निर्दलीयों की भरमार है, वहीं प्रभाग 10, 7 और 6 में एक भी निर्दलीय प्रत्याशी नहीं है, जिससे यहां सीधा दलीय मुकाबला देखने को मिलेगा।
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नाम वापसी की प्रक्रिया समाप्त होते ही 3 जनवरी, रविवार की सुबह 11 बजे चुनाव चिन्हों का वितरण किया जाएगा। चिन्ह मिलते ही चुनावी प्रचार की आंधी शुरू हो जाएगी। फिलहाल उम्मीदवार डोर-टू-डोर कैंपेनिंग और सोशल मीडिया के जरिए जनता तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। विशेष रूप से बदनेरा क्षेत्र के प्रभाग 21 और 22 पर पूरे शहर की नजरें टिकी हुई हैं।
पिछले चुनाव (2017) में भारतीय जनता पार्टी ने 45 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। कांग्रेस 15 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही थी, जबकि एमआईएम ने 10 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था। शिवसेना (ठाकरे गुट) को 7, बसपा को 5 और युवा स्वाभिमान को 3 सीटें मिली थीं। इस बार राज्य की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों और शिवसेना व राकांपा में हुए विभाजन के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा अपना किला बचा पाती है या विपक्ष नई इबारत लिखेगा।