Amravati Doctors Protest: महाराष्ट्र सरकार द्वारा सीसीपीएम पात्रता प्राप्त बीएचएमएस चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) में पंजीकरण देकर आधुनिक चिकित्सा की अनुमति देने के निर्णय के विरोध में गुरुवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के नेतृत्व में शहर के 700 से अधिक डॉक्टरों ने विशाल मोर्चा निकाला। इर्विन चौक स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक से जिलाधिकारी कार्यालय तक निकाले गए मोर्चे के बाद एक दिवसीय धरना देकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
आंदोलन के दौरान डॉक्टरों ने 'नकली मुन्नाभाई नहीं चाहिए' तथा 'मरीजों की सुरक्षा से समझौता नहीं' जैसे नारे लगाए। ओपीडी सेवाएं रहीं बंद आंदोलन के समर्थन में जिले के अधिकांश निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में ओपीडी एवं नियमित चिकित्सा सेवाएं बंद रहीं। निजी अस्पतालों की गैर-आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हुई। डॉक्टरों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी पेशेगत हित के लिए नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए है।
आईएमए ने कहा कि मामला वर्तमान में मुंबई हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए अंतिम निर्णय आने तक सीसीपीएम पात्रता वाले बीएचएमएस चिकित्सकों का एमएमसी में पंजीकरण तत्काल रोका जाए तथा मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
आईएमए अमरावती के अध्यक्ष डॉ. दिनेश वाघाडे और सचिव डॉ. विक्रम वानखड़े के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि सीसीपीएम का एक वर्षीय प्रशिक्षण एमबीबीएस की साढ़े पांच वर्ष की वैज्ञानिक एवं क्लीनिकल शिक्षा का विकल्प नहीं हो सकता। संगठन ने कहा कि बीएचएमएस चिकित्सकों का पंजीकरण पहले से महाराष्ट्र होम्योपैथी परिषद में है। ऐसे में उन्हें एमएमसी में पंजीकृत करने से आम जनता में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी।