Amaravati News: देश सेवा का संकल्प लेकर सीमा की रक्षा करने वाले अमरावती के लाडले सुपुत्र पराग सुरेशराव मोरे 38 कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए। वे भारतीय सेना के डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स विभाग में कार्यरत थे और वर्तमान में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में तैनात थे। हिंदू श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उपस्थित हजारों नागरिकों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।
मूल रूप से नांदगाव खंडेश्वर तहसील के मोखड गांव के निवासी और वर्तमान में अमरावती के साईनगर में रह रहे जवान पराग मोरे मध्यरात्रि 11 बजे से तड़के 3 बजे के बीच सुरक्षा टावर पर ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान मातृभूमि की रक्षा करते समय उनकी प्राणज्योति बुझ गई। हालांकि उनकी मृत्यु का सटीक कारण अभी सामने नहीं आया है।
सोमवार दोपहर सेना के विशेष वाहन से उनका पार्थिव शरीर साईनगर स्थित निवास स्थान पर लाया गया, जहां परिजनों का करुण क्रंदन हर किसी का कलेजा छलनी कर रहा था। इसके बाद निकली अंतिम यात्रा में जवान पराग मोरे अमर रहे के नारों से पूरा आसमान गूंज उठा। श्मशान घाट पर भारतीय सेना और अमरावती शहर पुलिस बल द्वारा उन्हें विशेष मानवंदना दी गई।
ये भी पढे़: स्वच्छ पेयजल नागरिकों का मौलिक अधिकार, पानी की कमी पर हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब
बडनेरा के थाना प्रभारी हनुमंत उरलागोंडावार ने प्रशासन की ओर से पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पुलिस के जवानों ने हवा में गोलियां दागकर अंतिम सलामी दी। पराग मोरे अपने पीछे वृद्ध मां, पत्नी मयुरी, 8 साल का बेटा संभव, 4 साल की बेटी ओमिषी और भाई से भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। पिता के साये से महरूम हुए इन मासूम बच्चों को देखकर वहां मौजूद हर नागरिक की आंखें छलक आईं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विशाखापट्टनम में भारतीय सैन्य दल में कर्तव्य पर रहते अमरावती के सुपूत्र पराग मोरे के शहीद होने पर शोक जताया। उन्होंने देशसेवा के लिए सर्वोच्च बलिदान देनेवाले जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की।