Manora Vat Savitri Vrat: तालुका में माताओं और बहनों ने 29 जून को बड़ी आस्था, भक्ति और उत्साह के साथ वटसावित्री का व्रत मनाया। सोमवार सुबह से ही बड़ी संख्या में विवाहित महिलाएं पारंपरिक परिधानों में मंदिर परिसर में मौजूद रहीं और गांव में वटवृक्ष के पेड़ की विधिवत पूजा की।
इस अवसर पर महिलाओं ने बरगद के पेड़ के चारों ओर पवित्र धागा लपेटा, आरती की और अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली के साथसाथ परिवार की सुखसमृद्धि की प्रार्थना की। इससे परिसर में धार्मिक माहौल बन गया था। महिलाओं ने पूजा सामग्री, फूल, फल और प्रसाद चढ़ाकर अनादि काल से चली आ रही इस परंपरा के सार को बनाए रखा।
पारंपरिक तरीके से पूजा करते हुए सावित्रीसत्यवान के अटूट रिश्ते को याद किया जाता है। हिंदू संस्कृति में वटसावित्री व्रत का विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावित्री ने अपने पक्के इरादे, समझदारी और पति के प्रति समर्पण की मदद से यमराज से अपने पति सत्यवान के जीवन को वापस पाया था।
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इसी की याद में शादीशुदा महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और अपने पतियों के हमेशा अच्छे भाग्य और लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। बरगद के पेड़ को लंबी उम्र, स्थिरता और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस मौके पर मंदिर में आई महिलाओं ने एकदूसरे को वटसावित्री की शुभकामनाएं दीं और भारतीय संस्कृति और परंपरा को बनाए रखने का संदेश दिया।