पत्र डाकपेटी में डालते हुए आंदोलनकारी व अन्य (सौजन्य-नवभारत) 
अकोला

ओवरब्रिज के लिए नागरिकों का अनोखा आंदोलन, 1000 पत्रों के माध्यम से डिप्टी CM पवार से लगाई गुहार

Akola Protest: अकोला जिले में नागरिकों ने ओवरब्रिज की मांग को लेकर अनोखा आंदोलन छेड़ा। अकोला के नागरिकों ने हजारों की तादात में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को पत्र भेजकर आंदोलन किया।

प्रिया जैस

Akola News: न्यू तापडिया नगर पंचशील नगर क्षेत्र के नागरिकों ने मंगलवार को एक अनोखा और शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया। रेलवे ओवरब्रिज के लिए लंबित 54 करोड़ की निधि को तत्काल मंजूर करने की मांग को लेकर नागरिकों ने राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री अजीत पवार को 1000 अंतरदेशीय पत्र भेजे। यह आंदोलन नीलेश देव के नेतृत्व में पहला चरण के रूप में जनहित में संयमित और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ।

इस अवसर पर शहर अध्यक्ष मनोहर बनसोड, साजन ( राजु) अपगड, डॉ. मुकुंद सातपुते, संदीप शेरेकर, मुकुंद देशपांडे, नरेंद्र परदेशी, विनोद भाबेरे, मोहन कनोजिया, अविनाश भागवत, भास्कर बैतवार, नाजुकराव पावसाडे, शैलेश देव के साथ अनेक विद्यार्थियों ने आंदोलन में हिस्सा लिया। अकोला के गेट क्रमांक 38 पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज शहर के लिए अत्यंत आवश्यक है।

80% कार्य पूरा

यह पुल पंचशील नगर, दुबे वाड़ी, चैतन्य नगर, जठार पेठ और रेलवे क्रॉसिंग के दोनों ओर के नागरिकों को स्थायी यातायात राहत प्रदान करेगा। राज्य सरकार, मध्य रेलवे और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से पुल का 80% कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष 54 करोड़ की निधि वित्त विभाग में लंबित होने के कारण पिछले कुछ महीनों से कार्य ठप पड़ा है।

शासन स्तर पर पत्राचार

मध्य रेलवे, भुसावल के उपमुख्य अभियंता द्वारा 5 दिसंबर 2024 और 18 मार्च 2025 को पत्र। सार्वजनिक निर्माण विभाग, अकोला द्वारा संशोधित अनुमानपत्रक वित्त विभाग को प्रस्तुत (शीर्षक: 30540238)। मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को निवेदन। 18 सितंबर 2025 को आंदोलन पत्र के माध्यम से जनआंदोलन की शुरुआत।

कार्य रुकना जनता के साथ अन्याय

“यह पुल केवल सीमेंट-कंक्रीट का नहीं, बल्कि अकोला के विकास का प्रतीक है। 80% कार्य पूर्ण होने के बाद निधि के अभाव में कार्य रुकना जनता के साथ अन्याय है। हम शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक तरीके से लेकिन दृढ़ता से यह संदेश उपमुख्यमंत्री तक पहुंचा रहे हैं। यदि सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो अगले चरण में ‘श्रृंखलाबध्द अनशन’ और उसके बाद ‘रोष मोर्चा’ किया जाएगा।”

- नीलेश देव, सामाजिक कार्यकर्ता, अकोला।

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