अकोला. इस साल 31 अगस्त से शुरू होने जा रहे गणेशोत्सव में सरकार द्वारा प्लास्टर ऑफ पैरिस की गणेश मूर्तियों पर प्रतिबंध लगाया गया है. इससे मूर्तिकारों को करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है. इस पृष्ठभूमि पर मुंबई एवं सातारा के जिलाधिकारियों ने प्रतिबंध के आदेश को 31 अगस्त पर स्थगित करते हुए प्लास्टर ऑफ पैरिस की मूर्तियों के निर्माण को अनुमति दी है.
इसी तर्ज पर अकोला जिले में भी पीओपी की मूर्तियों के निर्माण को अनुमति दिए जाने की मांग सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों जिलाधिकारी नीमा अरोरा से निवेदन द्वारा की है. महानगर के पिछले 128 सालों से गणेश मंडलों का उचित संचालन एवं व्यवस्थापन कर रहे सभी सार्वजनिक गणेश मंडलों के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर उन्हें उक्त निवेदन सौंपा.
राज्य के प्रमुख महोत्सव में शामिल गणेशोत्सव 31 अगस्त से शुरू हो रहा है. इस महोत्सव में लिए मूर्तियों का निर्माण शुरू हो चुका है, मगर पहले कोरोना संकट से बुरी तरह प्रभावित हुए मूर्तिकारों को अब प्लास्टर ऑफ पैरिस का उपयोग न करने का आदेश जारी कर सरकार ने एक नए संकट में डाल दिया है. कई मूर्तिकारों के कारखानों को जब्त कर उन्हें सील कर दिया गया है. संबंधित सभी कलाकार आर्थिक संकट में पड़ गए हैं.
इस बात को दृष्टि में रखते हुए मुंबई एवं सातारा जिलों की तर्ज पर यहां भी इस साल पीओपी की मूर्तियों के निर्माण से प्रतिबंध हटाए जाने की मांग की गई है. जिलाधिकारी नीमा अरोरा ने मूर्तिकारों को इस विषय में सकारात्मक निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया है. निवेदन की प्रतियां मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजी गई हैं.
सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल के अध्यक्ष एड. मोतीसिंह मोहता, महासचिव सिद्धार्थ शर्मा, कार्याध्यक्ष हरीश आलिमचंदानी, संग्राम गावंडे एवं रमाकांत खेतान के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में महासचिव विजय तिवारी, मनोज खंडेलवाल, विजय जयपिल्ले, जयंत सरदेशपांडे, नीरत शाह, मनोज शाहू, संतोष पांडे, विक्की ठाकुर, एड. राघव शर्मा, मंगेश काले, मनीष हिवराले, संतोष अग्रवाल, ललित उपरिकर, विजय मोरे, वैभव सुरड़कर, आदित्य उजवणे, पवन निखोरे, रूपेश चौरसिया एवं किरण वलीवकर का समावेश था.