अकोला: जिला परिषद (फोटो- नवभारत) 
अकोला

अकोला: जिला परिषद चुनाव में देरी से लोकतंत्र की 'रीढ़' कमजोर; प्रशासकों के राज में ठप हुए विकास कार्य

Akola News: अकोला जिला परिषद चुनाव बार-बार टलने से जनप्रतिनिधियों का अस्तित्व संकट में है। प्रशासनिक राज के कारण ग्रामीण विकास की गति धीमी हुई है और इच्छुक उम्मीदवारों का उत्साह भी ठंडा पड़ गया है।

रूपम सिंह

Akola Zilla Parishad Election: अकोला जिला परिषद चुनाव बार-बार स्थगित होने से स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लग गया है। सदस्य, पूर्व पदाधिकारी और इच्छुक उम्मीदवार अब पीछे हटते दिख रहे हैं। चुनाव क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को संभालना कठिन हो गया है, वहीं प्रशासनिक विलंब ने जिला परिषद परिसर की रौनक भी कम कर दी है।

जनता में यह धारणा गहराती जा रही है कि अधिकारी अपनी मनमर्जी से काम कर रहे हैं। राज्य की कई जिला परिषदों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन चुनाव घोषित नहीं हुए। आरक्षण, प्रभाग रचना और कानूनी अड़चनों का हवाला दिया जा रहा है, जबकि राजनीतिक समीकरण ही असली कारण बताए जा रहे हैं।

नतीजतन, अकोला जिला परिषद लगभग खाली हो चुकी है और जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति से प्रशासनिक तंत्र पर जनता का दबाव खत्म हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याओं पर निर्णय तो होते हैं, प्रस्ताव भी तैयार होते हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति से कार्यों की गति धीमी पड़ गई है। शिकायतों का निपटारा भी कागजों तक सीमित रह गया है।

लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर आघात

भारतीय संविधान के 73वे संशोधन में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं का महत्व स्पष्ट किया गया है। लेकिन समय पर चुनाव न होना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर ही आघात है। जिला परिषद ग्रामीण विकास की रीढ़ है, परंतु राजनीतिक अनिश्चितता ने इस रीढ़ को कमजोर कर दिया है। जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति से जनता का सीधा नियंत्रण समाप्त हो गया है और अधिकारी ही सर्वेसर्वा बन गए हैं।

इच्छुक उम्मीदवारों ने खर्च पर लगाई लगाम

चुनाव टलने से इच्छुक उम्मीदवारों ने अपने आर्थिक खर्च पर नियंत्रण करना शुरू कर दिया है। चुनाव कब होंगे, इसकी कोई निश्चितता नहीं है। कार्यकर्ताओं को संभालना कठिन हो गया है और हर त्योहार पर होने वाला खर्च उम्मीदवारों को भारी पड़ रहा है। इस असमंजस ने उनका उत्साह कम कर दिया है और कई इच्छुक अब पीछे हटते नजर आ रहे हैं।

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