अकोला

अक्षय तृतीया; असत्य और भ्रष्टाचार का विरोध ही भगवान परशुराम का सच्चा संदेश; पं. रवि शर्मा ने दी जानकारी

Akola News: अक्षय तृतीया (19 अप्रैल) पर अकोला के पं. रवि शर्मा ने बताया कि भगवान परशुराम का जीवन अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने समाज को एकता का संदेश दिया।

रूपम सिंह

Akshaya Tritiya 2026 News: अक्षय तृतीया का पर्व दान और पुण्य को अक्षय बनाने वाला माना जाता है। इस वर्ष रविवार 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। यह तिथि विशेष रूप से भगवान परशुराम के जन्मदिन के कारण जानी जाती है। घोर अपराधों का विरोध ही भगवान परशुराम है, इसी तरह से अन्याय और अपराधों के घोर विरोध का प्रतीक भी है, यह जानकारी अकोला पुरोहित संघ के पं। रवि कुमार शर्मा ने अक्षय तृतीया निमित्त दी है।

पं। शर्मा ने बताया कि परशुराम का जीवन संदेश यही है कि चाहे राजा हो या प्रजा, नगराध्यक्ष हो या अधिकारी, कोई बड़ा नेता हो या साधारण सेवक यदि वह अपराध, असत्य, अनाचार, दुराचार या भ्रष्टाचार करता है तो उसका घोर विरोध होना चाहिए।

यही कर्म भगवान परशुराम के नाम से जाना जाता है। इस कथा का तात्पर्य यही है कि यदि समाज में जातपात का भेदभाव हो तो क्रांति नहीं हो सकती। अपराधों के खिलाफ क्रांति उन्हीं देशों में होती है जहाँ जनता में एकता होती है। भगवान परशुराम का जीवन हमें यही सिखाता है कि असत्य और भ्रष्टाचार का विरोध करना ही सच्चा धर्म है।

अक्षय तृतीया का पर्व हमें परशुराम के आदर्शों को याद दिलाता है। अन्याय का विरोध, सत्य की रक्षा और समाज में समानता व भाईचारे की स्थापना। सहस्त्रबाहु अर्जुन और परशुरामकथा के अनुसार सहस्त्रबाहु अर्जुन अत्यंत बलशाली राजा था। ऋषि जमदग्नि ने उसका राजोचित सत्कार किया। जब राजा को ज्ञात हुआ कि ऋषि के पास कामधेनु नामक दिव्य गाय है, तो उसने उसे छीन लिया और ऋषि की हत्या कर दी।

माता रेणुका ने विलाप करते हुए परशुराम को पुकारा। तब परशुराम ने अकेले ही सहस्त्रबाहु अर्जुन की हजार भुजाएँ काट दीं और अत्याचारी राजाओं का विनाश किया।पाइंटरअन्याय के विरुद्ध संघर्षपरशुराम ने उन भ्रष्ट राजाओं को 21 बार समाप्त किया जो किसानों की जमीन और खेत छीन लिया करते थे।

विशेष बात यह रही कि उन्होंने अपने पास भूमि का एक कण भी नहीं रखा। गरीबों और तपस्वियों को सब कुछ दान कर दिया। स्वर्ण, हीरे, मोती, धनदौलत कुछ भी अपने पास नहीं रखा। उनका उद्देश्य केवल अन्याय का अंत करना था।

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