अकोला सीटू आंदोलन (सोर्सः सोशल मीडिया)
अकोला

अकोला में सीटू ने उठाया आंदोलन का हत्यार, जिलाधिकारी कार्यालय के सामने स्थायी रोजगार के लिए प्रदर्शन

ASHA Workers Protest: अकोला में सीटू से जुड़े आशा वर्कर्स, योजना कर्मचारियों और अन्य श्रमिकों ने चार श्रम संहिताओं के खिलाफ जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना दिया।

आंचल लोखंडे

CITU Protest Akola: चार श्रम संहिताओं को रद्द करने सहित विभिन्न प्रलंबित मांगों को लेकर सोमवार को आशा वर्कर्स एवं गट प्रवर्तक संगठन (सीटू) ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने जोरदार धरना आंदोलन किया। आशा वर्कर्स, योजना कर्मचारियों, ठेका एवं असंगठित कामगारों ने नारेबाजी करते हुए सरकार का ध्यान अपनी विभिन्न मांगों की ओर आकर्षित किया। सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, स्थायी रोजगार तथा स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था को मजबूत करने की मांग को लेकर यह आंदोलन किया गया। आशा वर्कर्स एवं गट प्रवर्तक संगठन की ओर से विभिन्न प्रलंबित मांगों को लेकर लगातार सरकार से पत्राचार और निवेदन किए जा रहे हैं।

इसके बावजूद मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने के कारण सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने आंदोलन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने, न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने और स्थायी रोजगार देने की मांग की। आंदोलन में कांग्रेस नेता राजन गावंडे, संध्या डिवरे, संतोष चिपडे, मीना गेबड, मीना जंजाल, कविता डोंगरे और मंजुला बांगर सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता तथा अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल हुए।

बिजली क्षेत्र के निजीकरण का भी विरोध

स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर चल रही चर्चा के बीच सीटू ने बिजली क्षेत्र से जुड़ी मांगों को भी प्रमुखता से उठाया। संगठन ने बिजली संशोधन विधेयक 2025 वापस लेने, शांति कानून रद्द करने तथा बिजली क्षेत्र का निजीकरण रोकने की मांग की। सभी कामगारों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 42 हजार रु. करने और उसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की मांग भी आंदोलनकारियों ने की।

संगठन और हड़ताल के अधिकार की मांग

आंदोलनकारियों ने कामगारों को संगठन बनाने, उसका पंजीकरण कराने, हड़ताल करने और सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार सुनिश्चित करने तथा ‘निश्चित अवधि रोजगार’ की व्यवस्था बंद करने की मांग की। सभी फसलों के लिए उत्पादन लागत के डेढ़ गुना के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य और उस मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की भी मांग रखी गई।

मनरेगा में 200 दिन काम की मांग

मनरेगा कानून को पूर्ववत लागू कर प्रत्येक परिवार को 200 दिनों का काम और निर्धारित दैनिक मजदूरी देने, किसानों, खेत मजदूरों और गरीबों की संपूर्ण कर्जमाफी घोषित करने तथा देशहित के विपरीत व्यापार समझौते रद्द करने की मांग की गई। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से कृषि और कृषि आधारित उद्योगों का आधुनिकीकरण करने की मांग भी उठाई गई। इसी तरह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सार्वजनिक सेवाओं का निजीकरण व ठेकेदारी बंद करने तथा ठेका, दैनिक, अनियमित कामगारों, फेरीवालों, कचरा बीनने वालों और स्वरोजगार करने वाले श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की गई। साथ ही स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, निवास और आवास के लिए सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग भी आंदोलनकारियों ने की।

बिहार के वैशाली में बड़ा हादसा, राघोपुर दियारा में नाव पलटने से 11 की मौत; मरने वाले में ज्यादातर बच्चे

कोलकाता में ममता बनर्जी पर जानलेवा हमले की कोशिश, हमलावर ने चाकू से किया अटैक- VIDEO

Explainer: 10 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले, पीएम मोदी का दावा कितना सच?

दिल्ली में प्रदर्शन के लिए चुकाने होंगे लाखों रुपये, रामलीला मैदान से CBD ग्राउंड तक; देखें किसका कितना चार्ज

INDIA ब्लॉक जारी रखेगा विरोध, गठबंधन की टी-पार्टी के बाद सुप्रिया सुले बोलीं- हम एक साथ हैं