Akola News: बार्शीटाकली तहसील के धानोरा ग्राम पंचायत से जुड़े दो स्वतंत्र मामलों में अतिरिक्त जिलाधिकारी द्वारा ग्राम पंचायत सचिव की उलट जांच रोकने के आदेश को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने रद्द कर दिया है. न्यायमूर्ति प्रफुल खुबलकर ने दिए गए निर्णय में संबंधित अधिकारी की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए दंडात्मक कार्रवाई के तहत दस हजार रुपये उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी से सार्वजनिक कल्याण निधि में जमा करने का आदेश दिया. पहले मामले में ग्राम पंचायत सरपंच साधना देवकर ने 4 अगस्त 2025 को अतिरिक्त जिलाधिकारी, अकोला द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी थी.
गांव के विठ्ठल जटे ने ग्राम पंचायत अधिनियम 1959 की धारा 141ज3 के अंतर्गत सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए अपात्रता की कार्यवाही शुरू की थी. दूसरे मामले में उपसरपंच रवि येवले ने उसी तारीख के आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल की थी. इसमें अनिल अडोले पर झूठे प्रतिज्ञापत्र प्रस्तुत करने का आरोप था. दोनों मामलों में ग्राम पंचायत सचिव की उलट जांच 28 अगस्त 2025 को निर्धारित थी, लेकिन नियोजित तारीख से पहले ही 4 अगस्त 2025 को अतिरिक्त जिलाधिकारी ने आदेश जारी कर उलट जांच रोक दी थी.
याचिकाकर्ता का कानूनी अधिकार छीनान्यायालय ने स्पष्ट किया कि निर्धारित तारीख से पहले आदेश जारी कर याचिकाकर्ताओं का कानूनी अधिकार छीना गया. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आर.डी. कारोडे ने प्रभावी पक्ष रखा, जबकि सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील एच.आर. धुमाले ने दलीलें दीं. न्यायालय ने दोनों आदेश रद्द करते हुए ग्राम पंचायत सचिव की उलट जांच की अनुमति देने का निर्देश दिया.
साथ ही, अतिरिक्त जिलाधिकारी की लापरवाह कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताते हुए दस हजार रुपये सार्वजनिक कल्याण निधि में जमा करने का आदेश दिया गया. यद्यपि संबंधित अधिकारी ने बाद में प्रतिज्ञापत्र के माध्यम से अपनी गलती स्वीकार कर बिना शर्त माफी मांगी, न्यायालय ने आदेशों को स्पष्ट रूप से अवैध ठहराया.