एनजीटी के आदेशों के बाद भी बेखौफ रेत माफिया (सोर्स- सोशल मीडिया) 
सीहोर

NGT के आदेशों की धज्जियां, सीहोर में मां नर्मदा का सीना चीर रहे रेत माफिया; जिला प्रशासन मौन

Sand Mafia Narmada River: बुधनी में नर्मदा का सीना चीर रहे रेत माफिया, NGT के नियमों को ताक पर रख 'यूफोरिया माइंस' द्वारा रात में पोकलेन से अवैध उत्खनन, प्रशासन मौन।

सजल रघुवंशी

Illegal Sand Mining Narmada River: राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) की सख्त पाबंदियों को ठेंगा दिखाते हुए मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा के आंचल को अवैध खनन माफियाओं द्वारा बेरहमी से लूटा जा रहा है सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह विधानसभा क्षेत्र बुधनी के अंतर्गत सरेआम चल रहा है क्षेत्र के जहाजपुरा, छिपानेर, आवली घाट, अम्बा बड़गांव , सातदेव, डीमावार चोरसाखेड़ी और विशाखेड़ी जैसे इलाकों में अवैध उत्खनन चरम पर है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

​रात के अंधेरे में पोकलेन मशीनों का तांडव

​स्थानीय स्तर पर 'जीपीएस मैप कैमारा' से सामने आए वीडियो साक्ष्यों ने प्रशासन के दावों की पोल खोल कर रख दी है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रात के अंधेरे में भारी-भरकम पोकलेन मशीनें नदी के बीचों-बीच उतरकर नर्मदा का सीना चीर रही हैं। नियमों को ताक पर रखकर 'यूफोरिया माइंस एंड मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी के लोग इस अवैध उत्खनन के खेल को अंजाम दे रहे हैं। दिन के उजाले में कानून का ढोंग करने वाली यह कंपनी रात होते ही पूरी ताकत से सक्रिय हो जाती है और दर्जनों डंपरों के जरिए पूरी रात नदी की संपदा को ठिकाने लगाया जा रहा है।

​अपने ही क्षेत्र में कार्रवाई से कतरा रहे रसूखदार?

​यह पूरा मामला सीधे तौर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय जनता, राजेश चौहान और नर्मदा प्रेमियों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि देश के इतने कद्दावर नेता के क्षेत्र में होने के बावजूद इन बेखौफ माफियाओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या राजनीतिक संरक्षण और रसूख के बल पर इन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं?

​सोया हुआ है खनिज विभाग और जिला प्रशासन

​इस महालूट ने सीहोर जिला प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने बड़े पैमाने पर हो रही भारी मशीनों की गूंज के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों को भनक तक न होना उनकी संलिप्तता की ओर इशारा करता है।

एनजीटी की पाबंदियां यहां सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई हैं। यदि जल्द ही 'यूफोरिया माइंस' और रेत माफियाओं पर सख्त कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया, तो मां नर्मदा के अस्तित्व और स्थानीय पर्यावरण को ऐसी अपूरणीय क्षति पहुंचेगी जिसकी भरपाई नामुमकिन होगी।

https://youtu.be/j5IMsWN8QrQ?si=7pqGjbU32Ww4972B

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