CWSN Hostel Closed Sehore (Source- Social Media) 
सीहोर

नए सत्र में भी बंद सीहोर का CWSN दिव्यांग बालिका छात्रावास; कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन व शाखा प्रभारी

Sehore CWSN Hostel News: सीहोर में प्रशासनिक संवेदनहीनता, नया सत्र शुरू होने के 10 दिन बाद भी CWSN दिव्यांग बालिका छात्रावास पर लटका ताला, कड़े विलेख संग विजीलैंस जांच तेज।

सजल रघुवंशी

CWSN Hostel Sehore Closed: मध्य प्रदेश में 1 जुलाई से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है सभी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में रौनक लौट आई है लेकिन सीहोर का दिव्यांग (सीडबल्यूएसएन) बालिकाओं के भविष्य को संवारने के लिए बनाया गया सीडबल्यूएसएन बालिका छात्रावास आज भी सरकारी उपेक्षा की धूल फांक रहा है।

नए सत्र के शुरू हुए 10 दिन बीत जाने के बाद भी इस छात्रावास के मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ है इस विभाग की शाखा प्रभारी और जिम्मेदार की इस घोर लापरवाही के कारण इन मूक-बधिर और दिव्यांग बच्चियों का भविष्य पूरी तरह से अंधकार में लटक गया है

आंखें मूंद कर बैठे हैं अधिकारी

​हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर विषय पर जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं। वहीं, 'आर एस शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति' जिसके कंधों पर इन विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की देखरेख और व्यवस्था का जिम्मा है, वह कुंभकरणीय नींद सोई हुई है। सत्र शुरू होने से पहले की जाने वाली तैयारियां तो दूर, समिति और विभाग ने इस बात की सुध लेना भी मुनासिब नहीं समझा कि दिव्यांग बच्चियां पढ़ाई के लिए कहां जाएंगी

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल

​बड़ा सवाल तो यह है कि जो बच्चे सामान्य बच्चों की तरह आसानी से कहीं भी आ-जा नहीं सकते उनके लिए सरकार ने विशेष व्यवस्थाएं की थीं लेकिन जब प्रशासनिक तंत्र ही संवेदनहीन हो जाए, तो ये बच्चे इंसाफ के लिए कहां जाएं? ​प्रशासन की इस ढुलमुल कार्यप्रणाली पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इन अधिकारियों और समिति के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई होगी? या फिर कागजी दावों के पीछे इन बच्चियों के अधिकारों को ऐसे ही दबा दिया जाएगा।

अभिभावकों में देखने को मिल रहा भारी आक्रोश

​स्थानीय नागरिकों और जागरूक अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। प्रशासन को तुरंत सचेत होते हुए इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए अगर जल्द ही छात्रावास का ताला नहीं खोला गया और लापरवाह शाखा प्रभारी के खिलाफ सख्त एक्शन नहीं लिया गया, तो यह इन मासूम बच्चों के मौलिक अधिकारों का सबसे बड़ा हनन होगा जिला प्रशासन को तुरंत इस कुंभकरणीय नींद से जागकर ताला खुलवाना चाहिए ताकि दिव्यांग बालिकाओं की शिक्षा सुचारू रूप से शुरू हो सके।

https://youtu.be/Uy3KdC7F3Os?si=i6v8WQh_P7-we4VI

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