122 Year Old Kandhe Wali Kali Tradition in Sagar: सागर में शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही सागर में मां दुर्गा की भक्ति और उत्साह का माहौल बन गया है। रविवार से शहर में जगह-जगह देवी प्रतिमाओं की स्थापना शुरू हुई। ढोल-ढमाकों के बीच श्रद्धालु माता की प्रतिमाएं लेकर पंडालों तक पहुंचे।
इसी दौरान सागर की प्रसिद्ध कांधे वाली काली को देखने और पंडाल तक ले जाने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालु माता की प्रतिमा को अपने कंधों पर उठाकर पुरव्याऊ टौरी स्थित पंडाल तक ले गए, जहां विधि-विधान से स्थापना की गई।
सागर के पुरव्याऊ टौरी में कांधे वाली काली की स्थापना की परंपरा करीब 122 साल पुरानी बताई जाती है। वर्ष 1905 में मूर्तिकार हीरासिंह राजपूत ने पहली बार भगवान गणेश, कार्तिकेय, मां सरस्वती और मां लक्ष्मी के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की थी। तभी से नवरात्र के दौरान माता को इसी स्वरूप में विराजमान करने की परंपरा चली आ रही है। इस प्रतिमा की खासियत इसे तैयार करने की पारंपरिक विधि है। प्रतिमा निर्माण में किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसे मिट्टी और वाटर कलर से तैयार किया जाता है।
नवरात्र के पहले दिन सागर शहर में 180 से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में आकर्षक पंडाल तैयार किए गए हैं, जहां श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। मोहननगर वार्ड में भैयाजी वैद्य काली की स्थापना की गई है। यहां नवरात्र के दौरान प्रतिदिन मां के अलग-अलग स्वरूप के दर्शन होंगे। वहीं, सराफा बाजार में नगर सेठानी की स्थापना की गई है। सदर क्षेत्र में भी एक दर्जन से अधिक स्थानों पर देवी प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।
सत्यनारायण गली में मां दुर्गा की स्थापना के साथ आकर्षक गुफा और केदारनाथ मंदिर का प्रतिरूप तैयार किया गया है। यहां श्रद्धालुओं को मंदिर के साथ भीम शिला, अलकनंदा नदी और भूतनाथ के दर्शन भी होंगे। नवरात्र के पहले दिन से ही शहर के देवी पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में पूजा-अर्चना, दर्शन और धार्मिक आयोजनों के साथ सागर में नवरात्र का उत्साह और बढ़ने की उम्मीद है।