Anmol Jain UPSC CAPF Success : अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत लगातार जारी रहे, तो असफलता भी सफलता की सीढ़ी बन सकती है। सागर जिले के गढ़ाकोटा के 25 वर्षीय अनमोल जैन ने इसी बात को सच साबित कर दिखाया है। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आखिरकार UPSC CAPF परीक्षा में ऑल इंडिया 271वीं रैंक हासिल कर असिस्टेंट कमांडेंट का पद हासिल किया। अनमोल की सफलता से परिवार के साथ पूरे गढ़ाकोटा में खुशी का माहौल है।
अनमोल की सफलता इसलिए खास है, क्योंकि उन्हें यह मुकाम आसानी से नहीं मिला। पिछले करीब साढ़े तीन साल से वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने क्लर्क से लेकर उच्च स्तर तक की 20 से ज्यादा सरकारी नौकरी की परीक्षाएं दीं। कई परीक्षाओं में असफलता मिली, लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी। UPSC CAPF में यह उनका तीसरा प्रयास था।
अनमोल के लिए पिछला CAPF प्रयास बेहद करीब तक पहुंचकर भी सफलता से दूर रह गया था। वह महज चार नंबर से चयन से चूक गए थे। इतनी करीबी असफलता के बाद भी उन्होंने इसे अपनी हार नहीं माना। अनमोल ने अपनी गलतियों का विश्लेषण किया और कमजोर विषयों पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने अगले प्रयास के लिए पहले से ज्यादा अनुशासित तरीके से तैयारी की।
तैयारी के दौरान अनमोल दिल्ली के हॉस्टल में रहे। उन्होंने ऑनलाइन माध्यम और सेल्फ स्टडी को अपनी तैयारी का आधार बनाया। उनकी रोजाना की दिनचर्या में 8 से 10 घंटे की पढ़ाई शामिल थी। वह छोटे-छोटे नोट्स तैयार करते, नियमित रूप से रिवीजन करते और ऑनलाइन मॉक टेस्ट के जरिए अपनी तैयारी को परखते थे। लगातार अभ्यास और कमजोरियों पर काम करने का फायदा उन्हें इस बार परीक्षा परिणाम में मिला।
अनमोल बताते हैं कि लगातार असफलताओं के दौरान कई बार हौसला टूटता था, लेकिन माता-पिता के चेहरे की खुशी की उम्मीद उन्हें दोबारा मेहनत करने की ताकत देती थी। उनका सपना था कि एक दिन वह अपने माता-पिता को अपनी सफलता पर गर्व महसूस करा सकें। अनमोल के पिता अरविंद जैन वकील हैं, जबकि उनकी मां अर्चना जैन शिक्षिका हैं। दो भाई-बहनों में अनमोल सबसे छोटे हैं।
UPSC CAPF में 271वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल कर असिस्टेंट कमांडेंट बनने वाले अनमोल जैन की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो एक-दो असफलताओं के बाद हार मान लेते हैं। उनकी सफलता बताती है कि असफलता मंजिल नहीं, बल्कि अगली जीत की तैयारी हो सकती है। करीब चार नंबर से चूकने के बाद भी अनमोल ने प्रयास जारी रखा और आखिरकार अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया। उनकी मेहनत और धैर्य ने न सिर्फ परिवार का सपना पूरा किया, बल्कि गढ़ाकोटा का नाम भी रोशन किया।