Congress District President Raises Issue: रीवा में प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर रीवा में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा का दर्द उस वक्त सामने आया, जब उन्होंने कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के सामने अपनी परेशानी बयां करते हुए कहा कि एसडीएम, तहसीलदार और कलेक्टर तक फोन नहीं उठाते।
जिला अध्यक्ष ने यहां तक कहा कि एक काम के लिए उन्हें पटवारी से मदद मांगनी पड़ी। यानी जिस काम के लिए प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच होनी चाहिए, उसके लिए जिला कांग्रेस अध्यक्ष को निचले स्तर के कर्मचारी का सहारा लेना पड़ा।
मामला यहीं नहीं रुका। जब कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने अधिकारियों के फोन नहीं उठाने की बात कलेक्टर के सामने रखी तो कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने जवाब दिया “फोन उठाना जरूरी नहीं है, जनता का काम होना चाहिए।” कलेक्टर का यह जवाब अपने आप में एक अलग बहस को जन्म देता है। सवाल यह है कि अगर अधिकारी फोन नहीं उठाते, तो आम नागरिक अपनी समस्या लेकर आखिर किससे संपर्क करे
कांग्रेस पार्टी देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टियों में से एक है और उसके जिला अध्यक्ष जब सार्वजनिक तौर पर यह कहने को मजबूर हों कि अधिकारी फोन नहीं उठाते, तो यह सिर्फ एक राजनीतिक शिकायत नहीं रह जाती बल्कि यह सवाल प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर भी खड़ा होता है। हालांकि दूसरा पहलू यह भी है कि क्या अधिकारियों तक अपनी बात नहीं पहुंचा पाना कांग्रेस जिला अध्यक्ष की संगठनात्मक या राजनीतिक नाकामी है या फिर नौकरशाही इतनी मजबूत हो चुकी है कि अब विपक्षी दल के जिला अध्यक्ष तक की शिकायतें भी उसकी प्राथमिकता में नहीं हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठते तो आम आदमी का क्या होता होगा, रीवा का यह मामला अब सिर्फ कांग्रेस जिला अध्यक्ष के दर्द तक सीमित नहीं है अगर अधिकारियों तक जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं पहुंच रहे, तो उस आम आदमी की क्या स्थिति होगी, जिसके पास न राजनीतिक पद है, न जिला प्रशासन तक पहुंच और न ही अधिकारियों के दफ्तर तक बार-बार जाने का समय।