--डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश की कलम से
Dr. Mohan Yadav on PM Modi Birthday: यशस्वी श्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में ढाई दशक की गौरवपूर्ण यात्रा पर विशेष राजनीति के मैदान में ऐसे अनेक नेता और जननेता हुए हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। इनमें कुछ अपनी प्रशासनिक क्षमता के लिए जाने गए, तो कुछ ने अपने राजनीतिक कौशल से अलग पहचान बनाई। लेकिन ऐसे नेता विरले ही होते हैं, जो संगठन से निकलकर मुख्यमंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकुशलता की मिसाल कायम करें और आगे चलकर प्रधानमंत्री के रूप में न केवल देश की राजनीति और शासन-व्यवस्था को नई दिशा दें, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाये।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सार्वजनिक जीवन ऐसी ही असाधारण यात्रा का उदाहरण है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग 13 वर्षों तक उन्होंने शासन की एक ऐसी शैली विकसित की, जिसमें विकास, सुशासन और जनभागीदारी को केंद्र में रखा गया। इसके बाद वर्ष 2014 में देश के प्रधानमंत्री का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने भारत को आत्मनिर्भर, सुरक्षित, समृद्ध और विश्व में प्रभावशाली राष्ट्र बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे परिस्थितियों को केवल देखते नहीं, बल्कि उनमें परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं।
दुनिया की राजनीति में कहां मौन रहना है, कहां अपनी बात स्पष्ट रूप से रखनी है और कहां दृढ़ता के साथ भारत के हितों की रक्षा करनी है। इसका संतुलन प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी विदेश नीति में लगातार प्रदर्शित किया है। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्होंने विश्व के विभिन्न शक्ति-केंद्रों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत किया है।
आज भारत विश्व राजनीति में एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। अमेरिका और रूस जैसे देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखना हो, पश्चिम एशिया में भारत के हितों की रक्षा करनी हो या रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे जटिल अंतरराष्ट्रीय विषयों पर शांति और संवाद का पक्ष रखना हो, प्रधानमंत्री ने भारतीय दृष्टिकोण को मजबूती से दुनिया के सामने रखा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी रही है कि संकट के समय भारत ने केवल अपने नागरिकों की ही चिंता नहीं की, बल्कि मानवता के प्रति अपने दायित्व को भी निभाया। कोरोना महामारी के कठिन दौर में भारत ने जिस प्रकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और जरूरतों का ध्यान रखा, वह अभूतपूर्व था। इसके साथ ही भारत ने अनेक देशों को दवाइयां, वैक्सीन और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई। श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से लेकर तुर्किए तक, जब भी आवश्यकता पड़ी, भारत ने सहायता का हाथ बढ़ाया।
युद्धग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अनेक अभियान चलाए गए। यूक्रेन में फंसे भारतीय विद्यार्थियों की सुरक्षित वापसी हो या संकटग्रस्त परिस्थितियों में अन्य भारतीय नागरिकों को स्वदेश लाना इन प्रयासों ने यह संदेश दिया कि भारत अपने प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
भारत की मानवीय संवेदनशीलता का परिचय उस समय भी मिला, जब कठिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद पड़ोसी देश पाकिस्तान के विद्यार्थियों को भी सुरक्षित उनके देश वापस पहुंचाने के प्रयास किए गए। यह भारतीय संस्कृति की उस भावना का परिचायक है, जिसमें मानवता को सर्वोपरि माना गया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री मोदी ने दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा आतंकी हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत आतंकवाद को सहन करने वाला देश नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर ने भी आतंकवाद के विरुद्ध भारत के संकल्प को दुनिया के सामने दृढ़ता से रखा। भारत ने यह स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई उसके लिए केवल सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान और नागरिकों की सुरक्षा का प्रश्न भी है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आतंकवाद को लेकर भारत की नीति में जो दृढ़ता आई है, उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी ध्यान आकर्षित किया है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे को वैश्विक मंचों पर प्रभावी ढंग से उठाने और आतंकवाद के खिलाफ व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में भारत को महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
हाल ही में दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के माध्यम से भारत ने वैश्विक मंच पर स्वयं को एक संतुलित, व्यवहारिक और नीतिगत रूप से स्वायत्त राष्ट्र के रूप में मजबूती से स्थापित किया है। भारत की साख एक ऐसे देश के रूप में बनी है जो वैश्विक दक्षिण (Global South) की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है और पश्चिमी देशों तथा पूर्वी शक्तियों के बीच संवाद का संतुलन बनाए रखने में सक्षम है। भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि ब्रिक्स किसी पश्चिम-विरोधी गुट के रूप में नहीं, बल्कि एक समावेशी और सुधारात्मक बहुपक्षीय मंच के रूप में कार्य करता है।
इसके अतिरिक्त, भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक विकास और आतंकवाद के प्रति कड़े रुख ने वैश्विक स्तर पर देश की विश्वसनीयता को और अधिक बढ़ाया है। इस पूरे परिदृश्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका अत्यंत निर्णायक और प्रभावी रही है। सम्मेलनों के दौरान विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों के साथ की गई उनकी द्विपक्षीय बैठकों ने न केवल जटिल क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाने में मदद की, बल्कि भारत के आर्थिक और व्यापारिक हितों को भी नई दिशा दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष गरीब और वंचित वर्गों के जीवन में बदलाव लाने का प्रयास है। जनकल्याण की योजनाओं में जाति, क्षेत्र या धर्म के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ देश के करोड़ों परिवारों तक पहुंचा है।
गरीबों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि उनके जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। पक्का घर, शौचालय, बिजली, गैस कनेक्शन, बैंक खाता, स्वास्थ्य सुरक्षा और खाद्यान्न की उपलब्धता जैसे विषयों को जनकल्याण की मुख्यधारा में लाया गया।
आयुष्मान भारत योजना ने गरीब और असहाय परिवारों के लिए गंभीर बीमारियों के उपचार को आर्थिक रूप से अधिक सुलभ बनाया। इसी प्रकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से करोड़ों जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया। प्रधानमंत्री के लिए ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ केवल नारा नहीं, बल्कि शासन का मूल मंत्र रहा है।
प्रधानमंत्री के रूप में दायित्व संभालते ही मोदी ने स्वच्छता को राष्ट्रीय अभियान का रूप दिया। उन्होंने स्वयं हाथ में झाड़ू लेकर स्वच्छता का संदेश दिया और देशवासियों से स्वच्छ भारत के निर्माण में भागीदारी का आह्वान किया। इस अभियान ने देश की सोच में परिवर्तन लाने का काम किया। गांवों से लेकर शहरों तक स्वच्छता जनआंदोलन बनी। मध्यप्रदेश ने भी इस अभियान में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। इंदौर का लगातार स्वच्छ शहरों में अग्रणी रहना इस जनभागीदारी का प्रेरक उदाहरण है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लिया। आज भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत स्थिति बना चुका है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे अभियानों ने उत्पादन, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा की हैं।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में भारत की बढ़ती क्षमता इसका प्रमाण है। भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। चंद्रयान-3 की सफलता और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग ने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की वैज्ञानिक क्षमता की ओर आकर्षित किया।
प्रधानमंत्री का मानना है कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा आबादी है। युवाओं को कौशल, रोजगार, स्वरोजगार, स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की गई हैं। मुद्रा योजना ने छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर लाखों युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। कौशल विकास और स्टार्टअप संस्कृति ने युवाओं में नौकरी खोजने के साथ-साथ रोजगार देने की भावना को भी मजबूत किया है।
महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए भी प्रधानमंत्री ने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए। उज्ज्वला योजना ने करोड़ों महिलाओं को रसोई के धुएं से राहत दिलाई। प्रधानमंत्री आवास योजना ने महिलाओं को परिवार की संपत्ति में अधिक सम्मानजनक भागीदारी का अवसर दिया। महिला आरक्षण कानून ने राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम रखा है।
‘लखपति दीदी’ अभियान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकास के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति समाज में आत्मविश्वास जगाने का कार्य किया है। ‘विरासत के साथ विकास’ की भावना के अनुरूप उन्होंने आधुनिक भारत को उसकी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया है। योग, जो भारत की हजारों वर्ष पुरानी जीवन पद्धति है, उसे वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने में प्रधानमंत्री की भूमिका उल्लेखनीय रही है।
उनके प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी। आज दुनिया के अनेक देशों में करोड़ों लोग योग को अपने स्वस्थ जीवन का हिस्सा बना रहे हैं।
यशस्वी मोदी के प्रयासों से अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा ने करोड़ों भारतीयों की आस्था और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दी। इसी प्रकार जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त करने का निर्णय राष्ट्रीय एकता और अखंडता की दृष्टि से ऐतिहासिक माना गया।
‘मन की बात’ के माध्यम से प्रधानमंत्री ने देश के सामान्य नागरिकों से सीधे संवाद की एक अनूठी परंपरा विकसित की। देश के दूरदराज के गांवों, छोटे शहरों और सामान्य परिवारों से जुड़े अनेक लोगों के कार्यों को राष्ट्रीय मंच मिला। यह संवाद प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें भारत का विकास केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से संभव माना गया है।
यशस्वी नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष केवल सत्ता में रहने की अवधि नहीं, बल्कि सेवा, संघर्ष, परिश्रम और राष्ट्र निर्माण की निरंतर यात्रा हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से समाज और राष्ट्र सेवा का संकल्प लेकर शुरू हुई यह यात्रा गुजरात के मुख्यमंत्री से होते हुए देश के प्रधानमंत्री तक पहुंची। उनके लिए राष्ट्र प्रथम है और यही भावना उनके प्रत्येक निर्णय में दिखाई देती है।
उन्होंने भारत को आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर, सुरक्षित और समृद्ध राष्ट्र बनाने का लक्ष्य सामने रखा है। उनके जन्मदिवस पर हम सभी का यह संकल्प होना चाहिए कि हम राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे और विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे।
कहा गया है......
“परिश्रम में जो तपा है, उसने ही तो इतिहास रचा है।
जिसने फौलादी चट्टानों को तोड़ा है, उसने ही समय को मोड़ा है।
समय को मोड़ देने का भी यही समय है, सही समय है।”
यह उद्घोष आज भारत के उस नेतृत्व के प्रति हमारे विश्वास को व्यक्त करता है, जिसने सेवा को साधना और राष्ट्र निर्माण को अपना ध्येय बनाया है। आइए, प्रधानमंत्री की 25 वर्षों की सेवा यात्रा के अवसर पर हम भी राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में अपनी आहुति देने का संकल्प लें। देश के लिए नई उम्मीदों का दीप जलाएं, अपने सामर्थ्य के अनुसार योगदान दें और उस भारत के निर्माण में सहभागी बनें, जिसका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनायकों ने देखा था।
प्रधानमंत्री के जन्मदिन 17 सितंबर को हम सभी अपने घरों और प्रतिष्ठानों में आशीर्वाद का एक दीप जलाएं और उनकी दीर्घायु, स्वस्थ एवं यशस्वी जीवन की कामना करें। यह दीप उस विश्वास का प्रतीक बने कि भारत की विकास यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रहे, देश आत्मनिर्भर एवं शक्तिशाली बने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत का संकल्प साकार हो।
‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना के साथ विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की यात्रा निरंतर आगे बढ़े, यही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर हमारी सबसे बड़ी शुभकामना है।
“जिसने जीवन संवारा, उसको नमन हमारा।”