Panna Majhgawan Dam Protest : पन्ना जिले में मझगाय बांध प्रभावितों का आंदोलन 16वें दिन भी जारी है। आंदोलनकारियों के अनुसार, लगातार बारिश और रेड अलर्ट के बीच आंदोलन स्थल की झोपड़ियां और अस्थायी व्यवस्थाएं पानी में डूब गईं। प्रभावित गांवों के कई घरों में दो से तीन फीट तक पानी भरने से अनाज, कपड़े और घरेलू सामान खराब होने का दावा किया गया है।
जय किसान संगठन के बैनर तले अमित भटनागर के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि मझगाय बांध से प्रभावित मड़लिया, टपरियां, कुंवरपुर, बहनरी, जुड़र, सर्रा और करिया खेत सहित कई गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। संगठन का दावा है कि कई प्रभावित परिवारों को अब तक पूरा मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं मिला है।
पन्ना के आंदोलनकारियों के मुताबिक, पिछले 15 दिनों से चिता, जल, मिट्टी, फांसी, सूली और बेड़ी सत्याग्रह के जरिए विरोध जताया जा रहा है। लगातार बारिश और पानी में रहने के कारण कुछ महिलाओं और अन्य आंदोलनकारियों के बीमार पड़ने के साथ पैरों में घाव और त्वचा संबंधी परेशानियां होने का भी दावा किया गया है।
आंदोलनकारियों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की धारा 11 की अधिसूचना जारी हुए आठ वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। उनका दावा है कि कई पात्र परिवार अब भी मुआवजे से वंचित हैं, जबकि कुछ परिवारों को पांच लाख रुपये तक ही भुगतान मिला है। अमित भटनागर के अनुसार, घोषित पैकेज 12.5 लाख रुपये का है। इसके अलावा मकान, कुएं, पेड़ और अन्य परिसंपत्तियों के मुआवजे का मामला भी लंबित बताया जा रहा है।
किसान नेता अमित भटनागर का कहना है कि संगठन विकास का विरोध नहीं करता, लेकिन प्रभावित आदिवासी परिवारों के कानूनी अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने प्रभावित परिवारों के नुकसान का तत्काल आकलन कर पूर्ण मुआवजा, पुनर्वास और राहत उपलब्ध कराने की मांग की है।
आंदोलनकारियों ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 38 का हवाला देते हुए मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है। वहीं, पन्ना जिला प्रशासन की ओर से नए सिरे से जांच और सर्वे की प्रक्रिया किए जाने तथा पात्र प्रभावितों को मुआवजा राशि वितरित किए जाने की जानकारी दी गई है।
पन्ना के आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक प्रभावित परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल लगातार बारिश के बीच आंदोलन स्थल और प्रभावित गांवों में जलभराव की स्थिति को लेकर आंदोलनकारियों की ओर से राहत और नुकसान के आकलन की मांग की जा रही है।