Morena Theft FIR Delay : मुरैना शहर के महावीरपुरा इलाके में चोरी के एक मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक परिवार के सूने मकान से लाखों रुपए का सामान चोरी होने की सूचना पुलिस को उसी दिन दे दी गई थी, लेकिन पांच दिन तक FIR दर्ज नहीं की गई। इसी दौरान चोर दोबारा उसी मकान में पहुंच गया।
घर से आ रही आवाज सुनकर मोहल्ले के लोगों ने घर में खटिया पर सो रहे नाबालिग को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पूछताछ में नाबालिग ने चोरी में तीन साथियों के शामिल होने और चोरी का सामान एक दुकान पर बेचने की बात बताई। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया, लेकिन FIR अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई है।
मामला महावीरपुरा निवासी कैलाश चंद्र राठौर के घर का है। कैलाश के बेटे अरविंद की तमिलनाडु में एक मकान की दूसरी मंजिल से गिरने से मौत हो गई थी। बेटे का शव लेने के लिए परिवार तमिलनाडु गया था। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए पूरा परिवार लल्लू बसई गांव चला गया। 6 अगस्त को कैलाश राठौर ने अपने नाती सौरभ को गैस सिलेंडर लेने के लिए मुरैना भेजा। सौरभ जब घर पहुंचा तो मकान के ताले टूटे हुए मिले। अंदर जाकर जांच की तो बक्से में रखा सामान गायब था। परिवार ने तत्काल पुलिस को चोरी की जानकारी दी।
पीड़ित परिवार के मुताबिक, चोर घर से सोने की दो अंगूठियां, चांदी की करधनी, पायजेब, करीब 10 हजार रुपए नकद, कूलर की किट, सबमर्सिबल पंप, दो गैस सिलेंडर, एलईडी टीवी, गैस चूल्हा और रेंजर साइकिल सहित एक लाख रुपए से अधिक का सामान ले गए। परिवार का आरोप है कि चोरी की सूचना देने के बावजूद पुलिस ने तत्काल FIR दर्ज नहीं की। परिजन कई दिनों तक थाने के चक्कर लगाते रहे, लेकिन मामला दर्ज नहीं किया गया।
इसी बीच बीती रात चोर दोबारा उसी सूने मकान में चोरी करने पहुंच गया। घर से आवाज आने पर पड़ोसी सतर्क हो गए। लोगों ने मकान में जाकर देखा तो एक युवक खटिया पर सो रहा था। मोहल्ले के लोगों ने उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसके नाबालिग होने की जानकारी सामने आई। लोगों ने नाबालिग को पुलिस के हवाले कर दिया। पूछताछ में उसने कथित तौर पर चोरी की पहली घटना में अपने तीन साथियों के शामिल होने की बात बताई। उसने यह भी बताया कि चोरी की वारदात के बाद सामान एक दुकान पर बेच दिया गया है।
नाबालिग को पकड़कर पुलिस के हवाले किए जाने के बाद पुलिस ने चोरी का मामला दर्ज किया। हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि FIR अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई है। यही बात अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बन गई है। परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पहली चोरी की सूचना पांच दिन पहले ही पुलिस को दे दी गई थी और बाद में उसी घर में दोबारा चोरी करने पहुंचे एक आरोपी को लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया, तो FIR अज्ञात आरोपियों के खिलाफ क्यों दर्ज की गई?
मामले को लेकर पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि पहली चोरी की सूचना के बाद समय पर FIR दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की होती तो शायद दूसरी बार चोरी की कोशिश को रोका जा सकता था।
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अब सवाल पुलिस कार्रवाई और FIR दर्ज करने में हुई देरी को लेकर उठ रहे हैं। खास बात यह है कि नाबालिग के पकड़े जाने और उसके द्वारा कथित तौर पर साथियों के नाम बताए जाने के बावजूद FIR में आरोपियों को अज्ञात बताया गया है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चोरी की दोनों घटनाओं में कौन-कौन शामिल था और चोरी का सामान कहां बेचा गया।