Highlights:
सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों से संभावित विस्थापन के विरोध में ओंकारेश्वर में आंदोलन।
19 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से 19 और 20 अक्टूबर को नगर बंद का ऐलान।
प्रभावित परिवारों ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर मुआवजा और पुनर्वास मांगा।
परिवारों के लिए भूखंड और व्यापारियों के लिए वैकल्पिक दुकानों की मांग।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं, विस्थापन के खिलाफ हैं।
Omkareshwar Singhstha 2028 Displacement Protest : सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत प्रस्तावित विकास कार्यों को लेकर ओंकारेश्वर में विरोध तेज हो गया है। स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और संपत्ति मालिकों ने स्पष्ट किया है कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसके नाम पर वर्षों से बसे परिवारों और कारोबारियों को विस्थापित करना स्वीकार नहीं करेंगे।
16 सदस्यीय समिति की 19 सूत्रीय मांगों पर प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद स्थानीय लोगों ने 19 और 20 अक्टूबर को दो दिन नगर बंद रखने का ऐलान किया है। शुक्रवार रात हुई नागरिकों और सर्वदलीय प्रतिनिधियों की बैठक में आंदोलन का निर्णय लिया गया।
बैठक में शामिल लोगों ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के लिए विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इनकी योजना बनाते समय स्थानीय नागरिकों के हितों और आजीविका का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रभावित परिवारों ने मांग की कि मकान-दुकानों पर कार्रवाई करने से पहले आवास, कारोबार और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। समिति ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर प्रभावितों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार सुरक्षा देने की मांग उठाई है।
समिति ने प्रभावित मकान-दुकानों का वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर स्वतंत्र एजेंसी से मूल्यांकन कराने और निष्पक्ष सीमांकन की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुआवजे की प्रक्रिया में संपत्ति के वास्तविक मूल्य को ध्यान में रखा जाना चाहिए। शासकीय पट्टे पर बने मकानों में रहने वाले और लंबे समय से निवास या कारोबार कर रहे पात्र लोगों को भी पुनर्वास का लाभ देने की मांग की गई है। प्रभावितों ने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था होने से पहले किसी को विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए।
पुनर्वास की मांग में वेलकम गेट के पास टंट्या मामा की प्रतिमा से गणेश नगर तक मुख्य मार्ग के दोनों ओर प्रभावित परिवारों को 60×90 फीट के भूखंड उपलब्ध कराने की मांग शामिल है। व्यापारियों के लिए आसपास ही वैकल्पिक दुकानें उपलब्ध कराने और किरायेदारों को पुनर्वास में प्राथमिकता देने की बात भी रखी गई है। इसके अलावा मुआवजे में रोजगार और कारोबार के नुकसान को शामिल करने, सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय देने और विस्थापन से पहले सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
बैठक में महंत मंगलदास त्यागी, प्रकाश परिहार, जयप्रकाश पुरोहित, गजेंद्र अग्रवाल, राजेश यादव, चंपाबाई, मायाबाई और संतोष वर्मा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। बैठक में निर्णय लिया गया कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने के विरोध में 19 और 20 अक्टूबर को ओंकारेश्वर बंद रखा जाएगा। स्थानीय लोगों ने कहा कि उनका उद्देश्य विकास कार्यों को रोकना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों और कारोबारियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित कराना है।