13 वर्षीय शाश्वत राजपूत ने लिखा सस्पेंस थ्रिलर (सोर्स- सोशल मीडिया)
जबलपुर

मोबाइल छोड़ हाथ में थमी कलम, जबलपुर के 13 वर्षीय शाश्वत राजपूत ने लिखा सस्पेंस थ्रिलर नॉवेल

Shashwat Rajput Thriller Novel: जबलपुर के 13 वर्षीय शाश्वत राजपूत की बड़ी उपलब्धि, लिखा सस्पेंस थ्रिलर नॉवेल, रहस्यों पर बुनी गई कहानी का शहर के गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में हुआ भव्य विमोचन।

पवन पटेल, सजल रघुवंशी

Shashwat Rajput Suspense Thriller Novel: जबलपुर में आज के दौर में छोटे छोटे बच्चे भी मोबाइल और सोशल मीडिया में ही डूबे रहते हैं और किताबों से उनका सीधा संपर्क नहीं हो पा रहा ऐसे में किसी बच्चे के द्वारा किताब लिखना और उस किताब में अपनी कल्पनाओं को शब्दों में ढालना असंभव नजर आता है लेकिन संस्कारधानी के 7 वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र ने "चेजिंग द अननोन" किताब लिख डाली।

ग्रीन सिटी में रहने वाले 13 वर्षीय शाश्वत राजपूत ने सस्पेंस और थ्रिलर पर आधारित किताब लिखी है जिसका हाल ही में अनावरण हुआ है, एक भव्य कार्यक्रम में शाश्वत के परिवार और शहर के गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में इस किताब का लोकार्पण किया गया। इस समारोह में शहर के साहित्यकार, लेखक और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग शामिल हुए थे जिन्होंने उसकी प्रतिभा की जमकर सराहना की।

न्यूयॉर्क से पेरिस तक घूमती है पारिवारिक रहस की कहानी

"चेजिंग द अननोन" किताब की कहानी की बात की जाए तो यह एक परिवार के इतिहास और उसके रहस्यों पर आधारित है जो शाश्वत के मन में धीरे धीरे कहानी गढ़ रही थी। कहानी में 14 वर्षीय जाॅन नामक बालक है जो अपने परिवार के साथ पेरिस से न्यूयॉर्क आता है। जहां उसे महसूस होता है कि उसका परिवार किसी पुराने और खौफनाक रहस्य से भाग रहा है। एक तूफानी रात जब वह अपने घर में अकेला रहता है तब बिजली गुल हो जाती है, सभी फोन बंद हो जाते हैं और घर के बाहर एक रहस्यमयी व्यक्ति का साया दिखाई देता है। चेहरे पर सफेद मुखौटे पर तीन लाल रंग की धारियों वाला यह अंजान शख्स जॉन के परिवार से जुड़ी ऐसी सच्चाई को सामने लाता है जो पूरे परिवार के लिए मुसीबत बन जाती है। इसके बाद लगातार हुए घटनाक्रम जॉन के जीवन में चुनौतियां और बदलाव लेकर आते हैं।

बचपन से किस्से कहानियों का रहा है शौक

पिता शैलेंद्र और मां भावना ने बेटे शाश्वत को हमेशा मोटिवेट किया और उसकी कल्पनाओं को कभी नकारात्मक भाव से नहीं देखा। शाश्वत ने अपने बारे में बताया कि एक आम बच्चे की तरह उसे भी बचपन से कहानियां पढ़ने और कल्पनाओं का शौक रहा है, वह अक्सर कहानियां पढ़ते पढ़ते उसे खुद से जोड़ने लगता था। धीरे धीरे इन्हीं कल्पनाओं को गढ़ते गढ़ते उसने किताब लिखना शुरू किया और अब सस्पेंस थ्रिल से भरी यह किताब लिख डाली। शाश्वत ने यह किताब लिखने में किसी की मदद नहीं ली और पढ़ाई के साथ साथ किताब लिखने का समय भी निकाला।

बच्चों के लिए प्रेरणा बने शाश्वत

जहां एक तरफ आज के जेन-अल्फा पीढ़ी और जेन जी अपना ज्यादातर समय रील्स बनाने और खुद को दिखावे में डुबोकर समय खराब कर रहे हैं और अपनी बुद्धिमत्ता को कमजोर करने में जुटे हैं वहीं शहशवत जैसे बच्चे समाज को दिशा देने का काम रहे हैं, बुद्धिजीवियों की मानें तो शाश्वत आज के जेन अल्फा के लिए प्रेरणा हैं जो अपनी अलग रह चुनते हैं और शिक्षा के साथ साथ अपनी इच्छाशक्ति से मंजिल तय करते हैं।

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