Jitu Patwari Male Rakhi Sawant : इंदौर में भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर तीखा हमला बोला है। मिश्रा ने पटवारी की तुलना कांग्रेस के ‘मेल राखी सावंत’ से करते हुए कहा कि जिस तरह राखी सावंत अलग-अलग गतिविधियों के जरिए सुर्खियों में बनी रहती हैं, उसी तरह जीतू पटवारी भी आए दिन बयानबाजी कर चर्चा में बने रहने की कोशिश करते हैं। भाजपा नगर अध्यक्ष की इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने भी पलटवार किया है।
सुमित मिश्रा ने आरोप लगाया कि जीतू पटवारी सार्वजनिक मंचों के साथ-साथ सोशल मीडिया के जरिए लगातार भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि पटवारी को हर मुद्दे में राजनीति दिखाई देती है और इसी वजह से वे लगातार बयान देकर सुर्खियों में बने रहने का प्रयास करते हैं। मिश्रा ने कहा कि सरकार पर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।
भाजपा नगर अध्यक्ष के जीतू पटवारी पर दिए गए बयान पर कांग्रेस की ओर से पलटवार किया गया। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के मीडिया कॉर्डिनेटर नीलाभ शुक्ला ने सुमित मिश्रा की टिप्पणी को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक सवालों का जवाब व्यक्तिगत टिप्पणियों से नहीं, बल्कि तथ्यों और प्रदेश की समस्याओं पर चर्चा के जरिए दिया जाना चाहिए।
नीलाभ शुक्ला ने कहा कि जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री के आंसुओं को लेकर जो राजनीतिक सवाल उठाया था, उसका जवाब तथ्यों के साथ दिया जाना चाहिए था। इसके बजाय भाजपा नगर अध्यक्ष द्वारा व्यक्तिगत उपमा देना यह दर्शाता है कि भाजपा के पास उठाए गए राजनीतिक सवालों का जवाब देने के लिए ठोस तथ्य नहीं हैं। उन्होंने भाजपा नेताओं से प्रदेश में हो रही मौतों, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों, युवाओं और आम जनता की समस्याओं को लेकर सरकार के कामकाज पर जवाब मांगा।
कांग्रेस मीडिया कॉर्डिनेटर ने कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणी करना आसान है, लेकिन जनता के सवालों का जवाब देना कठिन है। उन्होंने भाजपा नेताओं से कटाक्ष की राजनीति छोड़कर उन मुद्दों पर जवाब देने की मांग की, जिन्हें प्रदेश की जनता लगातार उठा रही है। शुक्ला ने कहा कि यदि पटवारी के सवाल गलत हैं तो भाजपा नेता तथ्यों के साथ उनका जवाब सार्वजनिक रूप से दें।
इंदौर कांग्रेस ने कहा कि राजनीतिक बहस व्यक्तिगत अपमान या टिप्पणियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बहस सरकार की नीतियों, कामकाज और जनहित के मुद्दों पर होनी चाहिए। भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाजी के बाद इंदौर की राजनीति में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।