Kailash Vijayvargiya Bengal Case: बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय से जुड़े पश्चिम बंगाल के मामलों को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इंदौर से भाजपा सांसद शंकर लालवानी के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। भाजपा इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि कांग्रेस ने चुनावी हलफनामे में जानकारी छुपाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
भाजपा सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिसके कारण उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया। लालवानी का आरोप है कि बंगाल में सत्तारूढ़ दल ने द्वेषपूर्ण कार्रवाई करते हुए विजयवर्गीय के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज कराए। ये सभी मामले झूठे और राजनीति से प्रेरित थे। पार्टी को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उनके अनुसार, अदालत में सच्चाई सामने आने के बाद ऐसे मामलों को वापस लिया जाएगा।
भाजपा के इस बयान पर कांग्रेस ने कड़ा पलटवार किया है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा कि यदि कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ मामले दर्ज थे, तो उनकी जानकारी चुनावी हलफनामे में स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मामलों की जानकारी छुपाना गंभीर विषय है और चुनाव आयोग को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि यदि हलफनामे में तथ्य छिपाए गए हैं, तो यह चुनावी नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
मुकेश नायक ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा 'जब सैयां भये कोतवाल, तो डर किस बात का। फिर केस वापस ही लिए जाएंगे।' कांग्रेस का आरोप है कि सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर विजयवर्गीय पर दर्ज मामलों को खत्म कराने की कोशिश की जा रही है।