Indore NDPS Lakhan Gupta Case: इंदौर के चर्चित एनडीपीएस मामले में आरोपी रहे पुलिसकर्मी लखन गुप्ता को अदालत से राहत मिलने के बाद अब उन्होंने कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। लखन गुप्ता ने दावा किया है कि उन्हें षड्यंत्र के तहत मामले में फंसाया गया, जिससे उनकी सामाजिक और पेशेवर छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा। इस संबंध में उन्होंने तीन आईपीएस अधिकारियों और 16 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए न्यायालय में निजी परिवाद दायर किया है।
लखन गुप्ता के अधिवक्ता नितिन पाराशर ने बताया कि उनके मुवक्किल ने विशेष न्यायालय में दायर परिवाद में तत्कालीन कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। अधिवक्ता के अनुसार न्यायालय ने परिवाद के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया। उनका कहना है कि पूर्व में न्यायालय ने यह पाया था कि लखन गुप्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। इसी आधार पर उन्हें मामले से राहत मिली थी और बाद में उनकी सेवा में भी बहाली हुई।
अधिवक्ता पाराशर ने कहा कि न्यायालय का यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि केवल आरोपों के आधार पर किसी अधिकारी या कर्मचारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। किसी भी आपराधिक कार्रवाई के लिए प्रथम दृष्टया ठोस साक्ष्य होना आवश्यक है।
दरअसल, यह मामला तेजाजी नगर थाना क्षेत्र में हुई एनडीपीएस कार्रवाई से जुड़ा है। उस समय पुलिस ने दो कथित तस्करों को 198 ग्राम संदिग्ध पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया था और आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी लखन गुप्ता उन्हें संरक्षण दे रहे थे। इस मामले में लखन गुप्ता को भी आरोपी बनाया गया और उन्हें 13 दिन जेल में रहना पड़ा।
हालांकि, बाद में भोपाल स्थित फोरेंसिक प्रयोगशाला और हैदराबाद की सेंट्रल ड्रग्स टेस्टिंग लैब की जांच में जब्त पदार्थ मादक पदार्थ नहीं बल्कि यूरिया पाया गया। इसके बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लखन गुप्ता को आरोपों से मुक्त कर दिया। अब लखन गुप्ता ने तीन आईपीएस अधिकारियों—विनोद मीणा, करणदीप सिंह और आदित्य सिंघारिया—सहित एनडीपीएस कार्रवाई में शामिल 16 सदस्यीय पुलिस टीम के खिलाफ निजी परिवाद दायर किया है।
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लखन के अधिवक्ता का कहना है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 200 के तहत दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। फिलहाल मामले में न्यायालय की आगामी सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि अदालत आगे की कार्रवाई का आदेश देती है, तो यह मामला एक नया कानूनी मोड़ ले सकता है।