ग्वालियर जेल से रिहा हुए 6 बंदी (फोटो सोर्स- नवभारत)
ग्वालियर

स्वतंत्रता दिवस पर ग्वालियर जेल से 6 बंदियों को मिली आजादी, रिहा कैदियों ने दिया जिंदगी में संयम रखने का संदेश

Gwalior Jail News : 15 अगस्त पर ग्वालियर केंद्रीय जेल से छह बंदियों को रिहाई मिली। अच्छे आचरण और अनुशासन के चलते सजा में छूट मिली। रिहा कैदियों ने लोगों से संयम बरतने की अपील की।

निशांत तिवारी, प्रीतेश जैन

Gwalior Central Jail Prisoners Released : स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ग्वालियर केंद्रीय जेल में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान लंबे समय से सजा काट रहे छह बंदियों को रिहाई का तोहफा मिला। जेल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में जेल अधीक्षक सहित प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी और जेल स्टाफ मौजूद रहा। अधिकारियों की मौजूदगी में सभी छह पात्र बंदियों को विधिवत जेल से रिहा किया गया। सलाखों के पीछे लंबा समय बिताने के बाद जब ये बंदी जेल से बाहर निकले तो उनके चेहरों पर नई जिंदगी शुरू करने की खुशी साफ दिखाई दी।

जेल अधीक्षक ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार के नियमों के तहत वर्ष में 15 अगस्त, 26 जनवरी और दो अन्य विशेष अवसरों पर पात्र बंदियों की सजा में छूट दी जाती है। इसके लिए जेल में अनुशासन, अच्छा आचरण और कार्य के प्रति निष्ठा जैसे मानकों को देखा जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत ग्वालियर केंद्रीय जेल में बंद छह कैदियों ने पात्रता पूरी की। इसके बाद उनकी बची हुई सजा माफ कर उन्हें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रिहा किया गया।

करीब 14 साल तक काटी सजा

रिहा हुए कुछ बंदियों ने बताया कि उन्होंने अलग-अलग मामलों में करीब 14 साल तक जेल में सजा काटी। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद बाहर निकलने का अनुभव उनके लिए बेहद भावुक रहा। रिहाई के बाद उन्होंने सरकार और जेल प्रशासन का आभार जताया। बंदियों के मुताबिक जेल में अनुशासन और सकारात्मक वातावरण ने उन्हें अपने जीवन को नए नजरिए से देखने का अवसर दिया। उनके बेहतर आचरण और सुधार को देखते हुए ही सजा में छूट मिली।

अपनों से मिलने की खुशी चेहरों पर दिखी

जेल से बाहर आते ही रिहा हुए बंदियों में अपने परिवार और करीबियों से मिलने की उत्सुकता दिखाई दी। लंबे समय बाद स्वतंत्र जीवन की ओर कदम बढ़ाने का मौका मिलने पर उनके चेहरे पर खुशी नजर आई। जेल प्रशासन की ओर से भी रिहाई की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें शुभकामनाएं दी गईं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुई यह रिहाई बंदियों के लिए नई शुरुआत का संदेश लेकर आई।

'आवेश में न उठाएं गलत कदम'

रिहा हुए कैदियों ने आम लोगों को एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि गुस्से, जल्दबाजी या क्षणिक आवेश में उठाया गया एक गलत कदम पूरी जिंदगी बदल सकता है। छोटी-सी कहासुनी या विवाद कब गंभीर अपराध में बदल जाए, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी विवाद में संयम बनाए रखें और कानून को अपने हाथ में लेने से बचें।

नई जिंदगी की शुरुआत का संकल्प

रिहा हुए बंदियों ने कहा कि जेल में बिताए वर्षों ने उन्हें जीवन की कई अहम सीख दी हैं। अब वे बाहर निकलकर नई शुरुआत करना चाहते हैं और समाज में बेहतर तरीके से जीवन बिताने की कोशिश करेंगे। वहीं, स्वतंत्रता दिवस पर हुई इस रिहाई ने जेल प्रशासन की सुधारात्मक व्यवस्था और अच्छे आचरण के महत्व को भी सामने रखा। रिहा हुए कैदियों का संदेश है कि एक पल का गुस्सा पूरी जिंदगी को प्रभावित कर सकता है, इसलिए हर परिस्थिति में धैर्य और संयम से काम लेना जरूरी है।

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