मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया) 
मध्य प्रदेश

'न शिक्षक हैं, न किताबें, फिर भी...', CBSE के त्रिभाषा नीति पर भड़के दिग्विजय सिंह, PM को लिखी चिट्ठी

Digvijaya Singh Letter To PM Modi: सीबीएसई की त्रिभाषा नीति पर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने PM से कक्षा 9 में त्रिभाषा नीति अनिवार्य करने को रोकने मांग की है।

अमन मौर्या

CBSE Three Language Formula Class 9: राज्यसभा सांसद एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नए शिक्षानीति के तहत लागू होने वाले त्रिभाषा नीति पर एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने सीबीएसई की कक्षा 9 में त्रिभाषा नीति को मध्य शैक्षणिक सत्र में अनिवार्य रूप से लागू किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है साथ ही इसके क्रियान्वयन को तत्काल स्थगित करने का आग्रह किया है।

सिंह ने प्रधानमंत्री को देशभर के सीबीएसई स्कूलों में पढ़ रहे 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के अभिभावकों द्वारा प्रस्तुत एक ज्ञापन प्रेषित करते हुए कहा है कि अभिभावकों की चिंताएं पूरी तरह जायज हैं और उन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

'बदलाव के लिए नहीं कोई तैयारी'

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि सीबीएसई द्वारा 15 मई 2026 को जारी परिपत्र के माध्यम से 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में तीसरी भाषा का अध्ययन अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है, जबकि अधिकांश विद्यालयों में न तो पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं, न ही आवश्यक पाठ्यपुस्तकें और न ही इस बदलाव के लिए पर्याप्त तैयारी का समय दिया गया है। ऐसी स्थिति में इस नीति को लागू करना लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित कर सकता है।

वर्तमान व्यवस्था को जारी रखने की अपील

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि दिसंबर 2025 में आयोजित सीबीएसई गवर्निंग बॉडी की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि जब तक एनसीईआरटी द्वारा भाषाओं की क्रमबद्ध पाठ्यपुस्तकें जारी नहीं कर दी जातीं, तब तक विद्यालयों में वर्तमान भाषा व्यवस्था को यथावत रखा जाए। इसके बावजूद सीबीएसई ने अपने ही निर्णय के विपरीत जाकर त्रिभाषा नीति लागू करने का निर्देश जारी कर दिया है।

पूर्वोत्तर अभी तैयार नहीं: दिग्विजय सिंह

उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के राज्य अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि वहां हिंदी सामान्य रूप से प्रचलित भाषा नहीं है। इसके अलावा कई स्थानीय एवं जनजातीय भाषाएं सीबीएसई की मान्यता प्राप्त भाषा सूची में भी शामिल नहीं हैं। वहीं संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में अपनाने की बढ़ती रुचि के बावजूद योग्य संस्कृत शिक्षकों और उपयुक्त पाठ्यसामग्री की भारी कमी है।

मामला न्यायालय में विचाराधीन

दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह विषय वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय 15 जुलाई 2026 को अपना फैसला सुनाएगा, जबकि विद्यालयों को 1 जुलाई से ही इस नीति को लागू करना है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों और विद्यालयों को अनिश्चितता की स्थिति में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि करोड़ों विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए त्रिभाषा नीति के क्रियान्वयन को तत्काल स्थगित किया जाए तथा आवश्यक संसाधनों, शिक्षकों और पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद ही इसे लागू किया जाए।

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