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दतिया

EXCLUSIVE: नरोत्तम मिश्रा की राजनैतिक विदाई और MP बीजेपी में नए पावरसेंटर का डर; टिकट कटने की ये है मुख्य वजह

Navbharat Live Analysis: नरोत्तम मिश्रा को साइडलाइन करने से मध्य प्रदेश बीजेपी में बढ़ी हलचल; पीढ़ीगत बदलाव और नए पावरसेंटर के डर पर नवभारत लाइव का विश्लेषण।

सजल रघुवंशी

Narottam Mishra Ticket Cancelled Analysis: दतिया विधानसभा उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बहुत बड़ा घटनाक्रम है। भाजपा के इस फैसले के कई अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा को पॉलिटिकली साइडलाइन करना कहीं न कहीं एक बहुत बड़ा संदेश है जो पार्टी देना चाहती है।

इस पूरे घटनाक्रम पर नवभारत ग्रुप के नेशनल हेड शैलेंद्र तिवारी और स्टेट हेड सुधीर दंडोतिया ने विस्तार से चर्चा की, इस चर्चा के दौरान कई बड़े पहलू निकलकर आए हैं। जिन्हें देख यह साफ हो गया कि दतिया उपचुनाव में भाजपा को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

राजनीति में एक-एक आंसु की कीमत

जब स्टेट हैड सुधीर दंडोतिया ने राजनीतिक विश्लेषक व नवभारत ग्रुप के नेशनल हेड शैलेंद्र से सवाल पूछा की भारतीय जनता पार्टी दतिया में कैसे डैमेज कंट्रोल कर पाएगी। तब शैलेंद्र तिवारी ने साफ कहा कि डैमेज कंट्रोल करना भाजपा के लिए काफी मुश्किल होगा, यहां तक की पार्टी को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। अब इसके पीछे की मुख्य वजह यह है कि कहीं न कहीं पार्टी के फैसले से नरोत्तम मिश्रा काफी आहत हुए हैं, पहली बार उनके आंसु देखें गए हैं। उनके यह आंसु सच्चे थे, क्योंकि वह ऐसे नेता नहीं है जो एक्टिंग करें और वो भी भरे मंच पर अगर वो आदमी अगर मंच से रोया है, तो इसकी कीमत भाजपा को चुकानी पड़ेगी और कैसे भाजपा इसका डैमेज कंट्रोल करेगी यह देखने वाली बात होगी।

एमपी भाजपा में नए पावरसेंटर का डर बना टिकट कटने की वजह?

गौरतलब है कि, उपचुनाव में कभी भी सर्वे नहीं होता। ऐसे में पार्टी का यह कहना की सर्वे के चलते उनका नाम काटा गया है, यह बात हजम नहीं होती। दरअसल, ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा के अंदर कुछ नेताओं को इस बात का डर था कि कहीं भारतीय जनता पार्टी में नया पावरसेंटर न बन जाए क्योंकि नरोत्तम मिश्रा अपने-आप में ही एक चलता-फिरता पावरहाउस हैं। उन्होंने कांग्रेस के 4 लाख कार्यकर्ताओं को भारतीय जनता पार्टी में शामिल किया था।

अभिमन्यु साबित हुए नरोत्तम मिश्रा!

गौरतलब है कि, हर बार नरोत्तम मिश्रा अभिमन्यु की तरह हारे हैं। पिछली बार भी वह जब चुनाव में हारे तब भी उन्हें अपनों ने ही घेरकर हराया था और इस बार भी यही हुआ उन्हें हराने कोई बाहर से नहीं आया बल्कि पार्टी ने ही उन्हें राजनीति से किनारे कर दिया। अब इसका अर्थ साफ है, उनका एक फेमस डॉयलॉग है कि राजनीति में राजनीत नहीं होगी तो कहां होगी, लेकिन अब नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ ही राजनीति हो गई।

नरोत्तम मिश्रा की पीढ़ी वाले भाजपा नेता में नया डर

गौरतलब है कि, नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक हत्या के बाद अब नोरत्तम मिश्रा की पीढ़ी वाले भारतीय जनता पार्टी के उन नेताओं जिन्होंने भाजपा को प्रदेश में जमाया। जिसमें कैलाश विजयवर्गीय, भूपेंद्र सिंह और प्रहलाद पटेल जैसे नेता शामिल हैं। उन्हें इस बात का डर सताने लगा है कि कब उनकी राजनीतिक विदाई हो जाए।

इन सभी पहलुओं के चलते दतिया विधानसभा उपचुनाव काफी ज्यादा दिलचस्प हो गया है। अब देखने वाली बात यह होगी की 30 जुलाई को होने वाली वोटिंग पर भारतीय जनता पार्टी को कितना नफा-नुकसान झेलना पड़ेगा और पार्टी कैसे डैमेज कंट्रोल कर पाएगी।

https://youtu.be/xBFs2xLyQ7k?si=iPNAQAX_XKo_fjV7

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