Kamal Nath Father 26 Bigha Land Fraud Case: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पिता स्वर्गीय महेंद्रनाथ की बिजनौर जिले में स्थित करोड़ों की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने का बड़ा मामला सामने आया है।
आरोपियों ने नजीबाबाद तहसील के अमीखानपुर गांव में स्थित उनकी 90 बीघा जमीन में से 26 बीघा पर जाली वसीयत और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर कब्जा कर लिया। मामले में नजीबाबाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, पूर्व सीएम कमलनाथ के पिता स्व. महेंद्रनाथ ने यह जमीन खरीदी थी, जो पिछले करीब तीन दशकों से बटाई पर दी गई थी। परिवार के लोगों का लंबे समय तक वहां आना-जाना नहीं हुआ, जिसका फायदा उठाकर आरोपियों ने साजिश रची।
फर्जी वसीयत: आरोपियों ने 10 अक्टूबर 1998 की तारीख में महेंद्रनाथ के नाम की एक फर्जी वसीयत तैयार की, जो रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत भी नहीं थी।
जाली मृत्यु प्रमाण पत्र: आरोपियों ने 10 अप्रैल 2003 को नजीबाबाद से महेंद्रनाथ का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवा लिया। जबकि कमलनाथ के अनुसार, उनके पिता का निधन 7 सितंबर 2004 को दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में हुआ था। जांच में शक है कि यह प्रमाण पत्र किसी प्रिंटिंग प्रेस से छपवाया गया था।
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब कमलनाथ ने 18 मई 2026 को जमीन पर विरासत दर्ज कराने के लिए नजीबाबाद तहसीलदार के यहां आवेदन किया। इस आवेदन पर संबंधित लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में जमीन को विवादित बताया। पड़ताल करने पर कमलनाथ को पता चला कि नजीबाबाद कोर्ट में धर्मपाल बनाम ग्राम सभा का एक मुकदमा चल रहा है, जिसमें धर्मपाल सिंह की ओर से उनके पिता की वही कथित फर्जी वसीयत दाखिल की गई थी।
सच्चाई सामने आने के बाद पूर्व सीएम कमलनाथ ने बिजनौर के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई को मोबाइल पर घटना की जानकारी दी और वॉट्सऐप व ईमेल के जरिए तहरीर भेजी।
एफआईआर दर्ज: नजीबाबाद पुलिस ने जसविंदर ढिल्लो, विजय शंकर, धर्मपाल सिंह और लेखपाल डेविड के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है।
गिरफ्तारी: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुरुवार को आरोपी धर्मपाल सिंह और विजय शंकर को गिरफ्तार कर लिया है।
मामले में नामजद लेखपाल डेविड की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है, जिसने हाल ही में नजीबाबाद से रिलीव होकर धामपुर में जॉइन किया है। यह वही लेखपाल है जिसे तीन साल पहले एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है और जमीन को पूरी तरह कब्जा मुक्त कराकर कमलनाथ को सौंपने की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि इस नेटवर्क ने कहीं और भी इस तरह का फर्जीवाड़ा तो नहीं किया है।