Umang Singhar Health Privatization Allegation: मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स मॉडल पर संचालित करने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए भाजपा सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण का आरोप लगाया।
उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश सरकार ने रीवा, गुना और देवास के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को आउटसोर्स मॉडल पर संचालित करने का निर्णय लिया है। निजी कंपनियां डॉक्टरों की नियुक्ति से लेकर मरीजों के इलाज तक का काम संभालेंगी और यह प्रयोग सफल रहा तो इसे 277 सीएचसी तक बढ़ाया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार आखिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बजाय उन्हें धीरे-धीरे निजी हाथों में क्यों सौंप रही है? पहले भर्ती नहीं करो, फिर अस्पतालों को कमजोर करो और अंत में निजीकरण को समाधान बताकर जनता के सामने परोस दो, यही भाजपा स्वास्थ्य मॉडल है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा जनता का अधिकार है, इसे कारोबार नहीं बनाया जाना चाहिए।
अपने पोस्ट में उमंग सिंघार ने लिखा कि ग्रामीण, गरीब, आदिवासी और वंचित वर्ग सरकारी अस्पतालों पर निर्भर है, लेकिन भाजपा सरकार स्वास्थ्य सेवा को अधिकार नहीं, कारोबार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आज 18 सीएचसी, कल 277 और फिर पूरा स्वास्थ्य तंत्र निजी हाथों में, क्या यही भाजपा का स्वास्थ्य विजन है?
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती की जाए, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाए और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता इलाज मांग रही है, ठेकेदारी नहीं।
ये भी पढ़ें : राजस्थान कोर्ट के आदेश से MP में सियासी भूचाल: कमलनाथ बोले– प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त
उमंग सिंघार के इस बयान के बाद प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की आउटसोर्सिंग और सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।