Umang Singhar on MP Assembly Session: मध्य प्रदेश में 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे विधानसभा के मानसून सत्र से पहले ही प्रदेश की सियासत गरमा गई है। सरकार द्वारा सत्र की अवधि महज 5 दिन निर्धारित किए जाने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही को सीमित करने और जनता के मुद्दों से बचने की कोशिश बताया है।
उमंग सिंघार ने कहा कि यह केवल विधानसभा की अवधि कम करने का तकनीकी मामला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र को सीमित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों से चुनकर आए विधायक 7 करोड़ से अधिक जनता की उम्मीदों और समस्याओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में सत्र को केवल 5 दिनों तक सीमित करना जनता के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। किसानों की बदहाली, कृषि संकट, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति जैसे कई महत्वपूर्ण विषय चर्चा की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश पर बढ़ता कर्ज, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बड़े मुद्दे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतने व्यापक विषयों पर प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण और जनहित के प्रस्तावों के माध्यम से केवल 5 बैठकों में सार्थक चर्चा संभव है? सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार इन सवालों के जवाब देने से बचना चाहती है।
उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस विधानसभा में बीजेपी सरकार को वॉकओवर नहीं देगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा जितने अधिक दिन चलेगी, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। कांग्रेस विधायक दल मानसून सत्र के एक-एक मिनट का उपयोग जनता के मुद्दों को उठाने और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए करेगा।
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उन्होंने कहा कि सरकार चाहे चर्चा से बचने का प्रयास करे, लेकिन जनता के सवालों से नहीं बच सकती। ऐसे में आगामी मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।