लोक शिक्षण संचालनालय (फोटो सोर्स- नवभारत) 
भोपाल

TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला लंबित, MP के शिक्षक संगठनों ने पुराने टीचर्स के लिए मांगी राहत

Teacher TET Exemption Demand: TET अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला लंबित है। इस बीच मध्य प्रदेश शिक्षक संगठनों ने 2015 से पहले नियुक्त शिक्षकों को राहत देने की मांग की है।

प्रीतेश जैन

Madhya Pradesh Teachers News: शिक्षकों की पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर चल रहे विवाद के बीच मामले में दाखिल रिव्यू पिटीशन पर 13 मई को हुई सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद अभी अंतिम फैसला आना बाकी है। इसी बीच मध्य प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने पुराने शिक्षकों को राहत देने की मांग तेज कर दी है।

शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत 2017 में 2015किए गए संशोधन से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट दी जाए। संगठनों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि संसद में पुनः स्पष्ट संशोधन लाया जाए या स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि सेवारत शिक्षकों के रोजगार और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

2017 संशोधन और राहत प्रावधान का हवाला

शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि RTE नियम 2017 के अनुसार 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को न्यूनतम योग्यता प्राप्त करने के लिए विशेष समय दिया गया था। उनका कहना है कि सरकार के राजपत्र (17 अक्टूबर 2017) में इसका स्पष्ट उल्लेख है। संगठन का तर्क है कि उस समय सरकार ने प्रशिक्षण योग्यता (डी.एड, बी.एड) पूरी करने के लिए समय दिया था, लेकिन TET को लेकर स्पष्ट शब्दावली नहीं थी। इसलिए अब इसे लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

पुराने शिक्षकों पर नई शर्तें अनुचित

शिक्षक संगठन का कहना है कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू की गई TET अनिवार्यता संविधान की भावना और प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। उनका कहना है कि सालों से कार्यरत शिक्षकों की सेवाओं और वरिष्ठता को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। संगठन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री द्वारा प्रस्तुत संशोधन विधेयक के उद्देश्य के अनुसार सेवारत शिक्षकों को राहत दी जाए।

संसद से स्पष्ट संशोधन की मांग

शिक्षक संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि संसद में दोबारा स्पष्ट संशोधन लाया जाए या आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की जाए, जिससे लाखों शिक्षकों की नौकरी और भविष्य पर अनिश्चितता खत्म हो सके।

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