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भोपाल

EXPLAINER: मामा बनाम मोहन! क्या शिवराज सिंह और CM के बीच चल रही खींचातानी; सुधीर दंडोतिया से समझें पूरी स्टोरी

MP Politics Explainer: मध्य प्रदेश की सियासत में 'मामा' बनाम 'मोहन' की खींचतान तेज! नवभारत लाइव के स्टेट हेड सुधीर दंडोतिया से समझिए पूरी इनसाइड स्टोरी।

सुधीर दंडोतिया, सजल रघुवंशी

Madhya Pradesh BJP Leadership Differences: मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों ‘मामा’ यानी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच शह-मात का खेल खुलकर सामने आने लगा है। सीहोर जिले के कोसमी गांव में बरेला आदिवासी परिवारों के 12 कच्चे मकानों पर चले बुलडोजर ने इस सियासी खींचतान को एक नया मोड़ दे दिया है।

शिवराज सिंह चौहान खुद प्रभावित परिवारों के साथ धरने पर बैठ गए और इसे "जुल्म की पराकाष्ठा" करार दिया। नवभारत लाइव डिजिटल के स्टेट हेड सुधीर दंडोतिया की माने तो यह स्थिति मध्य प्रदेश में बीजेपी नेताओ के बीच संवाद की कमी और आपसी खींचतान को साफ़ दिखा रही है ! यह पहला मौका नहीं है जब शिवराज अपनी ही पार्टी की सरकार के फैसलों या प्रशासनिक ढर्रे पर सवाल उठा रहे हों। मोहन यादव के कार्यकाल में पिछले कुछ महीनों में ऐसे तीन बड़े वाकये सामने आ चुके हैं।

सवाल 1: शिवराज के मना करने के बावजूद सीहोर में बुलडोजर कैसे चल गया?

जवाब: कार्रवाई रोकने का कोई लिखित प्रशासनिक आदेश समय पर जारी नहीं हुआ था। वन विकास निगम के मुताबिक, कोसमी गांव में 2021 में पौधरोपण कराया गया था। आरोप है कि कुछ बरेला आदिवासी परिवारों ने पौधों को नुकसान पहुंचाकर झोपड़ियां बनाईं और खेती शुरू कर दी। विभाग का कहना है कि नियमानुसार वन अपराध दर्ज कर बेदखली के नोटिस दिए गए थे।

जबकि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्होंने कार्रवाई से पहले ही वरिष्ठ अधिकारियों को परिवारों को न हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद रविवार को 12 घर गिरा दिए गए।शिवराज खुद प्रभावितों के साथ धरने पर बैठ गए। उन्होंने मौके से मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को फोन कर नाराजगी जताई और मौके पर किसी वरिष्ठ अधिकारी के न मौजूद होने पर सवाल उठाए।

सवाल 2: क्या यह पहली बार है जब शिवराज ने अपनी ही पार्टी की सरकार के सामने सवाल खड़े किए हैं?

जवाब: नहीं, डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में पिछले कुछ महीनों के भीतर ऐसे 3 बड़े मौके सामने आ चुके हैं: जून 2025 में देवास के खिवनी में वन विभाग ने 50 कच्चे घर गिराए थे। प्रभावित आदिवासी सीहोर कलेक्टोरेट पहुंचे, जहां शिवराज ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि आदिवासियों की जमीन कोई नहीं छीन सकता। इसके बाद सरकार ने सीहोर DFO का तबादला किया और विभागीय जांच के आदेश दिए।दूसरा मौका था जब राज्य सरकार केंद्र के नियमों का हवाला देकर केवल 25% मूंग खरीदने की बात कह रही थी। शिवराज सिंह ने कृषि मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर खरीदी की सीमा बढ़ाने को कहा।

अंततः सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच 60% मूंग खरीदी पर सहमति बनी।तीसरा मौका लाड़ली बहना योजना पर बयान को लेकर है (अक्टूबर 2026): मुख्यमंत्री द्वारा लाड़ली बहना योजना को "महंगी" बताने के संकेत के सात दिन बाद, शिवराज ने भोजपुर में मंच से कहा कि इस योजना को अब कोई सरकार बंद नहीं कर सकती और राशि धीरे-धीरे 3,000 रुपये तक बढ़ाई जाएगी।

सवाल 3: क्या शिवराज सच में नाराज हैं या इसके पीछे कोई सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है?

जवाब: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे शिवराज की सधी हुई राजनीतिक रणनीति है: आदिवासी, किसान और 'लाड़ली बहना' ऐसे वर्ग हैं, जिनके पक्ष में खड़े नेता पर हमला करना पार्टी या सरकार के लिए कठिन होता है।मुख्यमंत्री पर नहीं: शिवराज सीधे मुख्यमंत्री को कटघरे में खड़ा करने के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों पर निशाना साधते हैं।

वह कहते हैं कि "कुछ अफसर पार्टी और मुख्यमंत्री की छवि खराब करना चाहते हैं।" इससे वे पार्टी की लक्ष्मण रेखा लांघे बिना अपनी बात रख पाते हैं।जनाधार और केंद्रीय मौजूदगी: विश्लेषकों के अनुसार, शिवराज मध्य प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं और साथ ही दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व में अपनी मजबूत उपस्थिति का अहसास कराना चाहते हैं।

सवाल 4: तो क्या मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के बीच सब ठीक नहीं है?

जवाब:सार्वजनिक मंचों पर दोनों नेता एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, लेकिन प्रशासनिक फैसलों और जनहित के मुद्दों पर दोनों का रुख अलग नजर आता है,न: अगस्त 2026 में शिवराज ने मोहन यादव की तारीफ करते हुए कहा था कि उनमें उनसे कई गुना ज्यादा ऊर्जा है। सीहोर घटना पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा— "हमारी सरकार संवेदनशील है, वरिष्ठ नेता ने बात रखी है तो जांच कराने में कोई बुराई नहीं है।"

विपक्ष का हमला: कांग्रेस ने इसे भुनाना शुरू कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने X पर लिखा— "'मोहन-मामा' की आपसी खींचतान में बेकसूर आदिवासी परिवार उजड़ रहे हैं।" वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है।

आगे क्या होगा?

इस मामले की जांच अब दो स्तरों पर होगी:

  • राज्य सरकार: मुख्यमंत्री द्वारा मांगी गई प्रशासनिक जांच रिपोर्ट।

  • राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST): आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव, DGP, प्रमुख सचिव (वन), सीहोर कलेक्टर और SP को नोटिस जारी कर 3 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब और दस्तावेज मांगे हैं।

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