Rahul Gandhi Birthday Wish: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश की राजनीति में एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। जहां एक ओर कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी के प्रति अपना सम्मान और स्नेह व्यक्त किया, वहीं भाजपा खेमे में सन्नाटा पसरा रहा। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा उस 'दूरी' की है, जो कांग्रेस से पाला बदलकर भाजपा में आए उन नेताओं ने बनाई है, जो कभी राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते थे।
राहुल गांधी के जन्मदिन पर राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर-शोर से है कि जो नेता कभी राहुल गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे, उन्होंने अब जन्मदिन की शुभकामनाओं से भी परहेज किया। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अब तक राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई नहीं दी है। न केवल सिंधिया, बल्कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए प्रदेश के अन्य प्रमुख नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर चुप्पी साधे रखी। राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता और विचारधारा के बदलते समीकरणों के साथ-साथ पुरानी निष्ठाओं के 'दबाव' के रूप में देख रहे हैं।
एक तरफ जहां पूर्व कांग्रेसियों की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक अलग मिसाल पेश की। उन्होंने दलगत राजनीति और वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। शिवराज द्वारा दिखाई गई यह उदारता अब राजनीतिक गलियारों में प्रशंसा का केंद्र बनी हुई है। लोग इसे एक स्वस्थ और परिपक्व लोकतंत्र की निशानी बता रहे हैं।
इधर, कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल है। प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राहुल गांधी को 'जननायक' संबोधित करते हुए कहा कि वे गरीब, वंचित और युवाओं के लिए न्याय की उम्मीद हैं। उन्होंने राहुल गांधी के संघर्ष और लोकतंत्र के प्रति उनके संकल्प की सराहना की।
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राहुल गांधी का यह जन्मदिन मध्य प्रदेश की राजनीति में एक स्पष्ट रेखा खींच गया है। जहां एक ओर कांग्रेस अपने नेता के प्रति एकजुट दिखी, वहीं भाजपा में उन नेताओं की चुप्पी पर बहस छिड़ गई है जिन्होंने विचारधारा बदलकर पार्टी बदली है। शिवराज सिंह चौहान की यह 'बर्थडे विश' न केवल चर्चा में है, बल्कि यह भी दिखा गई है कि व्यक्तिगत शिष्टाचार राजनीति से कहीं ऊपर होता है।