मध्य प्रदेश में राज्यसभा की खाली हुई सीट को लेकर विश्लेषण फोटो सोर्स- AI
भोपाल

Navbharat Analysis: राज्यसभा सीट पर दिल्ली का फैसला पहले से तय? सुधीर दंडोतिया बोले- नाम मांगना महज औपचारिकता

BJP Rajya Sabha Candidate : MP की खाली राज्यसभा सीट पर 12 नवंबर को उपचुनाव होगा। सुधीर दंडोतिया ने भाजपा उम्मीदवार चयन में दिल्ली की भूमिका पर सवाल उठाए। प्रदेश और बाहरी नेताओं के नाम चर्चा में हैं।

सुधीर दंडोतिया, प्रीतेश जैन

Highlights:

  • मध्यप्रदेश की खाली राज्यसभा सीट पर 12 नवंबर को उपचुनाव

  • सुधीर दंडोतिया ने उम्मीदवार चयन में केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका पर उठाए सवाल

  • भाजपा की कोर कमेटी में प्रदेश के कई नेताओं के नामों पर चर्चा

  • वनथी श्रीनिवासन समेत दूसरे राज्यों के नेताओं के नाम भी चर्चा में

  • 2 नवंबर नामांकन की अंतिम तारीख, उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार

MP Rajya Sabha By election : मध्यप्रदेश में राज्यसभा की खाली हुई एक सीट को लेकर भाजपा के भीतर उम्मीदवार चयन की कवायद जारी है। इसी बीच वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सुधीर दंडोतिया ने केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सीट के लिए उम्मीदवार का नाम दिल्ली में पहले ही तय हो चुका हो सकता है और प्रदेश से संभावित नामों का पैनल मंगवाना महज औपचारिकता हो सकती है।

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद मध्यप्रदेश की एक सीट रिक्त हुई है। इस सीट पर 12 नवंबर को उपचुनाव होना है। 26 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर हुई भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद चार से पांच नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजने पर सहमति बनी। हालांकि, पार्टी ने अब तक उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

प्रदेश के नेताओं के नामों पर चर्चा

भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य, अरविंद सिंह भदौरिया, रंजना बघेल, पूर्व राज्यसभा सदस्य सुमेर सिंह सोलंकी और पूर्व विधायक अमर सिंह के नामों की चर्चा होने की खबर है। वहीं, मध्यप्रदेश से बाहर के नेताओं के नाम भी संभावित दावेदारों के तौर पर सामने आए हैं। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस और पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश भाजपा ने मध्यप्रदेश और दूसरे राज्यों के संभावित नेताओं के नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजने का निर्णय लिया है। तमिलनाडु की पूर्व विधायक वनथी श्रीनिवासन का नाम भी चर्चाओं में है। इनमें से किसी नाम पर अभी आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।

सुधीर दंडोतिया ने उठाए चयन प्रक्रिया पर सवाल

सुधीर दंडोतिया के विश्लेषण के मुताबिक, प्रदेश स्तर पर नामों की चर्चा और पैनल तैयार होने के बावजूद अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व की प्राथमिकताओं के आधार पर हो सकता है। उनका मानना है कि यदि उम्मीदवार का नाम पहले ही तय है, तो प्रदेश से नाम मांगने की प्रक्रिया औपचारिकता बनकर रह जाती है। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व ने उम्मीदवार का नाम पहले से तय होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

पहले भी मध्यप्रदेश से चुने गए बाहरी नेता

दंडोतिया ने कहा कि मध्यप्रदेश राज्यसभा उपचुनाव की सीटों के लिए पहले भी दूसरे राज्यों से जुड़े नेताओं को प्रतिनिधित्व मिला है। केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन इसका उदाहरण हैं। वे तमिलनाडु से जुड़े भाजपा नेता हैं और मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। सितंबर 2021 में पहली बार और अप्रैल 2024 में दोबारा चुने गए मुरुगन का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था, लेकिन उनके इस्तीफे के बाद सीट रिक्त हो गई। ऐसे में इस बार भी किसी बाहरी नेता को मौका मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

स्थानीय दावेदारों की उम्मीदें केंद्रीय फैसले पर टिकीं

मध्यप्रदेश भाजपा में कई नेता राज्यसभा जाने की उम्मीद लगाए हुए हैं। यदि पार्टी दूसरे राज्य के किसी नेता को उम्मीदवार बनाती है, तो प्रदेश के दावेदारों को निराशा हो सकती है। उम्मीदवार चयन में संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय राजनीतिक जरूरतें भी भूमिका निभा सकती हैं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 2 नवंबर है, जबकि 12 नवंबर को मतदान और मतगणना प्रस्तावित है। अब सबकी नजर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर है।

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