MP Water Conservation Model International Recognition: जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की पहल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन रही है। भोपाल के भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा समागम’ में छह देशों के राजनयिकों ने प्रदेश में चल रहे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की सराहना करते हुए इसे जल संकट से निपटने का प्रभावी मॉडल बताया। कई प्रतिनिधियों ने इस पहल को अपने देशों में भी लागू करने की इच्छा जताई।
सात दिवसीय इस आयोजन में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और इक्वाडोर के राजनयिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और जनभागीदारी के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण पर चर्चा की गई।
साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस वराईओनाइडेस ने कहा कि जल संकट आज पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे में लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने वाले अभियान बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए इसे अन्य देशों के लिए भी उपयोगी बताया।
फिजी के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जल सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भारत और फिजी की चिंताएं समान हैं तथा मध्यप्रदेश की पहल प्रेरणादायक है।
मेक्सिको दूतावास की संस्कृति प्रमुख वनेसा एड्रियन ने जल संरक्षण को वैश्विक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि नदियों और जल स्रोतों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास सराहनीय है। वहीं नेपाल दूतावास के प्रथम सचिव दीपक पोरखिरे ने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने वाला यह आयोजन बेहद महत्वपूर्ण है।
त्रिनिदाद एवं टोबैगो के उच्चायुक्त चंद्रदत्त सिंह ने कहा कि सांस्कृतिक माध्यमों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश लोगों तक पहुंचाना एक प्रभावी पहल है। दूसरी ओर, इक्वाडोर के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जॉर्ज विनिशियो अनरंगो ने घोषणा की कि वे मध्यप्रदेश के अनुभवों से सीख लेते हुए अपने देश में भी जल संरक्षण को लेकर इसी तरह का आयोजन करने पर विचार करेंगे।
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कार्यक्रम के दौरान राजनयिकों ने मध्य प्रदेश में जनभागीदारी आधारित जल गंगा संवर्धन अभियान की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझा। बताया गया कि राज्य में अब तक दो लाख से अधिक जल संरचनाओं के निर्माण और पुनर्जीवन का कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि तीन लाख संरचनाओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में मध्यप्रदेश की पहल अन्य राज्यों और देशों के लिए भी उदाहरण बन सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही सराहना से यह स्पष्ट है कि जल प्रबंधन और संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश का मॉडल वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा है।