MP के एक दर्जन से ज्यादा जिलों में अघोषित बिजली कटौती से हाहाकार
मंदसौर, राजगढ़, सीहोर समेत कई जिलों में बिजली संकट, कम वोल्टेज से लोग परेशान
सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिलने से किसानों की बढ़ी चिंता, कई जगह विरोध प्रदर्शन
बिजली संकट पर CM मोहन यादव से मिले मंत्री-विधायक, कैबिनेट बैठक में भी उठा मुद्दा
Unannounced Power Cuts Spark Political Protests In MP: मध्य प्रदेश में इन दिनों अघोषित बिजली कटौती और कम वोल्टेज की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है। यह मुद्दा अब केवल ग्रामीण इलाकों और खेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सीधे तौर पर सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
राज्य के एक दर्जन से अधिक जिलों में पिछले एक हफ्ते के दौरान बिजली आपूर्ति चरमराने से जनता और किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है, जिसके चलते कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हो चुके हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले जिलों में मंदसौर, राजगढ़, सीहोर, बड़वानी, धार, झाबुआ, खंडवा, आगर मालवा, नर्मदापुरम और बुरहानपुर प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन इलाकों में बिजली की आंख-मिचौली और लंबी-लंबी कटौतियों के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
इस समय खेतों में फसलों को पानी देने के लिए बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन अघोषित कटौती और कम वोल्टेज के कारण न तो नलकूप (ट्यूबवेल) ठीक से चल पा रहे हैं और न ही किसानों को समय पर सिंचाई के लिए बिजली मिल पा रही है। फसलों के सूखने के डर से किसानों का सब्र टूट गया है, जिसके चलते वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।
जनता और किसानों के बढ़ते दबाव का असर अब जनप्रतिनिधियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों के कई स्थानीय विधायक और मंत्री इस गंभीर समस्या से परेशान हैं। अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के गुस्से का सामना कर रहे कई विधायकों ने मुख्यमंत्री के समक्ष गुहार लगाई है और तत्काल प्रभाव से बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है ताकि हालात को और बिगड़ने से बचाया जा सके। कैबिनेट की बैठक में कई मंत्रियों ने इस मुद्दे को उठाया जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें संकट से निजात दिलाने का भरोषा भी दिलाया।