राहुल गांधी और मीनाक्षी नटराजन (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया) 
भोपाल

Rajya Sabha Election: दिग्विजय सिंह के इनकार के बाद राहुल गांधी की पसंद पर लगी मुहर, जानें MP का पूरा गणित

Meenakshi Natarajan Congress Candidate: MP राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है। दिग्विजय सिंह के चुनाव लड़ने से इनकार के बाद राहुल गांधी की करीबी पर भरोसा जताया है।

प्रीतेश जैन

MP Rajya Sabha Election 2026: इंडियन नेशनल कांग्रेस ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए 5 राज्यों की 7 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल सीट भी शामिल है, जहां से कांग्रेस ने मंदसौर लोकसभा क्षेत्र की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को चुनावी मैदान में उतारा है। मीनाक्षी नटराजन को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कोर टीम का हिस्सा और उनका बेहद करीबी माना जाता है।

मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल आगामी 21 जून को समाप्त हो रहा है। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे तीसरी बार राज्यसभा नहीं जाना चाहते। उनके इनकार के बाद से ही मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर इस सीट को लेकर भारी लॉबिंग शुरू हो गई थी। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में पहले से ही चर्चा थी कि अगर राहुल गांधी की पसंद पर मुहर लगती है, तो मीनाक्षी नटराजन का दिल्ली जाना तय है। आखिरकार केंद्रीय नेतृत्व ने उनके नाम को हरी झंडी दे दी।

क्या है मध्य प्रदेश का वोट गणित?

मध्य प्रदेश विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो राज्यसभा की एक सीट आसानी से जीतने के लिए 58 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। चुनाव की गणितीय स्थिति कुछ इस प्रकार है-

कांग्रेस की स्थिति: दतिया सीट खाली होने, विजयपुर विधायक के मतदान से बाहर रहने और निर्मला सप्रे के दलबदल जैसी चुनौतियों के बावजूद कांग्रेस के पास फिलहाल 62 विधायक हैं। यह आंकड़ा एक सीट जीतने के जादुई आंकड़े (58) से 4 अधिक है। ऐसे में कांग्रेस की एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है।

बीजेपी की स्थिति: विधानसभा में बीजेपी के पास वर्तमान में 164 विधायक हैं। राज्यसभा की दो सीटें आसानी से जीतने के लिए बीजेपी को 116 वोटों की जरूरत होगी। इसके बाद भी तीसरी सीट के लिए बीजेपी के पास 48 अतिरिक्त विधायक बचेंगे।

तीसरी सीट पर सस्पेंस

यदि बीजेपी तीसरी सीट के लिए अपना उम्मीदवार उतारती है, तो उसे बहुमत के लिए 10 और वोटों की जरूरत होगी। निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायकों का समर्थन मिलने के बाद भी बीजेपी बहुमत से 8 वोट दूर रहेगी। हालांकि, जोड़-तोड़ की राजनीति में समीकरण कभी भी बदल सकते हैं। फिलहाल बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस मामले पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।

समझें राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया

राज्यसभा के सांसदों का चुनाव आम चुनावों से काफी अलग होता है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं-

  • अप्रत्यक्ष मतदान: राज्यसभा के सदस्यों को देश की जनता सीधे वोट नहीं देती, बल्कि राज्यों के विधानसभा सदस्य (विधायक) चुनकर भेजते हैं।
  • स्थायी सदन: राज्यसभा कभी पूरी तरह भंग नहीं होती। यह एक स्थायी सदन है, जिसके एक-तिहाई (1/3) सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं और उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं।
  • वोट वैल्यू का गणित: इस चुनाव में जीत के लिए जरूरी वोटों का कोटा पहले से तय फॉर्मूले से तय होता है। यह फॉर्मूला कुल विधायकों और खाली सीटों की संख्या पर आधारित होता है। चुनाव प्रक्रिया में एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 मानी जाती है।

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