पेसा कर्मचारियों ने किया आंदोलन (सोर्स- सोशल मीडिया) 
भोपाल

MP News: 5200 पेसा मोबिलाइजरों की सेवा समाप्ति पर बवाल; हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

MP PESA Protest: मध्य प्रदेश में 5200 पेसा मोबिलाइजरों की सेवा समाप्ति पर बवाल मचा हुआ है। भारतीय मजदूर संघ ने सीएम मोहन यादव को ज्ञापन सौंपकर, 18 मई का आदेश रद्द करने की मांग उठाई है।

सजल रघुवंशी

MP PESA Protest Against Mobilizer Seva Samapti: मध्य प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं समाप्त किए जाने के विरोध में अब कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध पंचायत पेसा मोबिलाइजर कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपकर पंचायत राज संचालनालय के आदेश क्रमांक 8448 दिनांक 18 मई 2026 को तत्काल निरस्त करने और सभी पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं बहाल करने की मांग की है।

संघ का आरोप है कि प्रदेश के जनजातीय जिलों में वर्षों से कार्यरत पेसा मोबिलाइजरों को बिना सुनवाई और बिना किसी पूर्व सूचना के सेवा से मुक्त कर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। कर्मचारियों का कहना है कि पेसा मोबिलाइजर अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों में पेसा अधिनियम 1996 के प्रचार-प्रसार, ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, समितियों के गठन, ग्रामीण विवादों के समाधान, तेंदूपत्ता संग्रहण प्रबंधन, नशामुक्ति और शासन की योजनाओं के प्रति जनजागरूकता फैलाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

5200 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

संघ के अनुसार इस फैसले से प्रदेश के करीब 5200 पेसा मोबिलाइजरों को अचानक सेवा से हटा दिया गया, जिससे 5200 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों का कहना है कि एक झटके में नौकरी छिन जाने के बाद उनके पास आजीविका चलाने का कोई वैकल्पिक साधन नहीं बचा है और परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।

सेवा समाप्ति आदेश को रद्द करने की उठी मांग

ज्ञापन में कहा गया है कि मध्य प्रदेश के हजारों पेसा मोबिलाइजर लंबे समय से जनजातीय क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं लेकिन अब उन्हें अचानक बेरोजगार कर दिया गया है। संघ ने मांग की है कि सेवा समाप्ति के आदेश को तत्काल निरस्त कर सभी कर्मचारियों की सेवाएं बहाल की जाएं तथा उनके लिए स्थायी नीति बनाई जाए।

सरकार को चुनाव के दौरान किए गए वादे याद दिलाए

पेसा मोबिलाइजरों ने सरकार को विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादे की याद दिलाते हुए कहा कि श्योपुर उपचुनाव 2024 में मानदेय 4 हजार से बढ़ाकर 8 हजार रुपये करने की घोषणा की गई थी, जिसे अब तक लागू नहीं किया गया। कर्मचारियों ने बढ़े हुए मानदेय का एरियर सहित भुगतान करने, पिछले 8 से 10 महीनों से लंबित मानदेय दो दिन के भीतर खातों में जमा कराने तथा किसी भी मोबिलाइजर की सेवा समाप्त करने से पहले निष्पक्ष जांच और सुनवाई का अवसर सुनिश्चित करने की मांग की है।

संघ ने सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि एक ओर सरकार लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के संचालन के लिए बड़े पैमाने पर कर्ज लेकर योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाली महिला पेसा मोबिलाइजरों का मानदेय देने के लिए सरकार के पास पर्याप्त बजट नहीं है। संघ ने इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

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