MP Moong Procurement Conflict: मध्य प्रदेश में मूंग उत्पादक किसानों का आक्रोश चरम पर है। राजधानी भोपाल और आसपास के जिलों के किसान सरकारी केंद्रों पर समय पर और पूरी मूंग खरीदी न होने से बेहद नाराज हैं। अपनी मांगों को लेकर नर्मदापुरम के प्रसिद्ध सेठानी घाट से सैकड़ों किसान पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री आवास (सीएम हाउस) का घेराव कर प्रदर्शन किया।
इसके बाद सरकार ने खरीदी बढ़ा दी इसके बाद आंदोलन तो समाप्त हुआ पर किसान अब भी नाराज है। किसानों की स्पष्ट मांग है कि सरकार राज्य में पैदा हुई मूंग की 100 फीसदी खरीदी करे। आंदोलन के दबाव के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने फिलहाल किसानों की 60% मूंग खरीदने की मांग स्वीकार कर ली है।
एक तरफ किसान सड़कों पर हैं, तो दूसरी तरफ मूंग खरीदी के कोटे को लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं।
दस्तावेजों और आंकड़ों की पड़ताल से सामने आया है कि मध्य प्रदेश सरकार तय सीमा से अधिक मूंग खरीदकर वित्तीय बोझ तले दबती जा रही है। केंद्र के तय कोटे से अधिक मूंग खरीदने, उसका परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन), वेयरहाउस में भंडारण करने और बाद में उसे बाजार में बेचने की प्रक्रिया में मध्य प्रदेश सरकार को भारी घाटा हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, औसतन हर साल सरकार को करीब ₹1,115 करोड़ से ₹1,153 करोड़ का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। बीते तीन वर्षों (2023-24 से 2025-26) में लक्ष्य से अधिक खरीदी करने के कारण राज्य सरकार को कुल ₹3,346 करोड़ रुपये की हानि हुई है या होने का अनुमान जताया गया है।
केंद्र सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश पूरे देश में सबसे ज्यादा मूंग खरीदने वाला राज्य है, उत्पादन की तुलना में खरीदी को देखें तो पता चलता है कि मध्य प्रदेश में हर साल कुल मूंग उत्पादन का करीब 20% से 22% हिस्सा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाता है। इसके विपरीत, राजस्थान में यह आंकड़ा महज 5% से 10% के बीच रहता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अधिकांश वर्षों में यह आंकड़ा 3% से भी कम या शून्य रहा है।
2023-24: स्वीकृत लक्ष्य 2.76 लाख मीट्रिक टन → वास्तविक खरीदी: 2.76 लाख मीट्रिक टन
2024-25: स्वीकृत लक्ष्य 3.31 लाख मीट्रिक टन → वास्तविक खरीदी: 2.90 लाख मीट्रिक टन
2025-26: स्वीकृत लक्ष्य 3.51 लाख मीट्रिक टन → वास्तविक खरीदी: 4.20 लाख मीट्रिक टन (स्वीकृत लक्ष्य से काफी अधिक)
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राज्यों के बीच इस असंतुलन और कोटे की उलझन के कारण इस बार मध्य प्रदेश की मूंग खरीदी व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ाई हुई है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
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