गोविंद सिंह राजपूत (सोर्स- सोशल मीडिया)
भोपाल

MP हाईकोर्ट से मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को बड़ी राहत; हलफनामे में संपत्ति छिपाने की याचिका खारिज

Govind Singh Rajput Election Affidavit Case: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को बड़ी राहत, चुनावी हलफनामे में संपत्ति छिपाने के आरोप वाली राजकुमार धनोरा की याचिका खारिज।

सुधीर दंडोतिया, सजल रघुवंशी

Govind Singh Rajput Get Relief From High Court: मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री और सुरखी (सागर) से भाजपा विधायक गोविंद सिंह राजपूत को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता एवं पूर्व प्रत्याशी राजकुमार धनोरा द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी शपथपत्र (फॉर्म-26) में संपत्ति की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था।

इससे पहले कांग्रेस प्रत्याशी नीरज शर्मा की ओर से दायर इसी तरह की याचिका भी न्यायालय खारिज कर चुका है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद इस प्रकार के मामलों की समीक्षा का अधिकार निर्वाचन आयोग या जिला निर्वाचन तंत्र के पास नहीं रहता।

संपत्ति छिपाने के लगाए गए थे आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया था कि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में नामांकन के दौरान अपने, अपनी पत्नी तथा परिवार से संबंधित ज्ञानवीर सेवा समिति की कुछ अचल संपत्तियों का उल्लेख शपथपत्र में नहीं किया। याचिकाकर्ता राजकुमार धनोरा ने निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि मंत्री की ओर से अदालत में दलील दी गई कि शिकायत चुनाव परिणाम घोषित होने के करीब 17 महीने बाद दर्ज कराई गई, इसलिए यह कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है।

हाईकोर्ट ने कानून का हवाला देते हुए खारिज की याचिका

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले एन.पी. पोन्नुस्वामी बनाम रिटर्निंग ऑफिसर का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81(1) के अनुसार चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद चुनावी शपथपत्र या अन्य चुनावी अनियमितताओं को केवल 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है। इसके बाद रिट याचिका दायर करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है।

अदालत ने समय-सीमा और अधिकार क्षेत्र दोनों स्पष्ट किए

एमपी हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि यदि किसी प्रत्याशी पर गलत शपथपत्र देने का आरोप है तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125-ए के तहत सक्षम आपराधिक न्यायालय में एक वर्ष के भीतर निजी परिवाद दायर किया जा सकता है। इस मामले में वह समय-सीमा भी समाप्त हो चुकी थी।

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अदालत ने निर्वाचन आयोग के निर्णय को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। उल्लेखनीय है कि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ कांग्रेस नेता राजकुमार धनोरा पहले भी कई आरोप लगा चुके हैं, लेकिन विभिन्न मामलों में उन्हें न्यायालय से राहत नहीं मिल सकी है।

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