Simultaneous Municipal Panchayat Elections In MP: मध्य प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और कम समय में पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है। इसी कड़ी में नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को एक ही चुनावी अवधि में कराने की तैयारी पर भी मंथन चल रहा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग चुनावों के कारण लंबे समय तक लागू रहने वाली आदर्श आचार संहिता की अवधि को कम करना है।
प्रदेश में 2027 में नगरीय निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं और पंचायत चुनाव भी इसी अवधि में होने हैं। नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां शुरू होने की पुष्टि पहले ही हो चुकी है। जून 2026 में महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष पदों के आरक्षण की प्रक्रिया के लिए नगरीय प्रशासन आयुक्त को अधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया था।
सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग की कोशिश है कि निकाय और पंचायत चुनावों की प्रक्रिया को इस तरह से प्लान किया जाए कि अलग-अलग चरणों में लंबे समय तक चुनावी आचार संहिता लागू न रहे। यदि दोनों चुनावों की प्रक्रिया एक ही अवधि में पूरी होती है तो प्रशासनिक मशीनरी को भी बार-बार चुनाव ड्यूटी में लगाने की जरूरत कम होगी। आचार संहिता लागू होने के दौरान विकास कार्यों और नई योजनाओं से जुड़े फैसलों पर भी निर्वाचन नियमों के तहत प्रतिबंध रहता है। ऐसे में चुनावों को कम समय में पूरा करने से सरकार और जिला प्रशासन को नियमित कामकाज संचालित करने में सुविधा मिल सकती है।
मध्य प्रदेश में 2027 के नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों की तैयारियों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर काम शुरू कर दिया है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक जून-जुलाई 2027 में चुनाव कराए जाने की संभावना को ध्यान में रखकर तैयारियां की जा रही हैं। साथ ही मतदान प्रक्रिया को अधिक डिजिटल बनाने पर भी जोर है।
2027 के चुनावों में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव में पंच और सरपंच पदों के लिए भी ईवीएम के इस्तेमाल की तैयारी कर रहा है। अभी तक इन पदों के चुनाव में मतपत्र का इस्तेमाल होता रहा है। यदि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है तो पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में मतदान प्रक्रिया बड़े स्तर पर ईवीएम आधारित हो जाएगी। इसके अलावा मतदान केंद्रों की वेबकास्टिंग और चुनाव प्रक्रिया को डिजिटल बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मतदान केंद्रों की निगरानी मजबूत करने और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।
निकाय और पंचायत चुनाव अलग-अलग समय पर होने की स्थिति में चुनावी प्रक्रिया लंबे समय तक चल सकती है। इससे संबंधित क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित होने और प्रशासनिक गतिविधियों पर असर पड़ने की स्थिति बनती है। ऐसे में दोनों चुनावों को एक ही चुनावी विंडो में कराने का मॉडल प्रशासनिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मध्यप्रदेश में अभी तक निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने का अंतिम कार्यक्रम या आधिकारिक चुनाव तारीखों की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल चुनाव आयोग की तैयारियों और प्रस्तावित व्यवस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
2027 के चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची, आरक्षण, मतदान केंद्र, निर्वाचन कर्मचारियों की उपलब्धता, ईवीएम और तकनीकी व्यवस्थाओं सहित कई स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं। आयोग का फोकस चुनाव प्रक्रिया को समयबद्ध, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर है। यदि निकाय और पंचायत चुनाव एक ही अवधि में कराने की योजना अंतिम रूप लेती है, तो प्रदेश में लंबे समय तक अलग-अलग चुनावों के कारण लागू रहने वाली आचार संहिता से राहत मिल सकती है। साथ ही चुनावी ड्यूटी में लगने वाले कर्मचारियों और प्रशासनिक संसाधनों के इस्तेमाल को भी अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।