Guest Faculty Form VJP After Minister Statement: मध्य प्रदेश की राजधानी में अतिथि विद्वानों का आंदोलन अब एक नया और बड़ा राजनीतिक मोड़ ले चुका है। वर्षों से नियमितीकरण की बाट जोह रहे अतिथि विद्वानों ने अब सीधे तौर पर सिस्टम को चुनौती देते हुए अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है। इस नई पार्टी का नाम 'विद्वान जनता पार्टी (वीजेपी)' रखा गया है।
यह कड़ा कदम तब उठाया गया, जब प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने 'फॉलेन आउट' प्रक्रिया को रोकने से साफ इनकार कर दिया और कथित तौर पर अतिथि विद्वानों को खुद की पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने की सलाह दे डाली।
फॉलेन आउट प्रक्रिया के विरोध में अतिथि विद्वान पिछले तीन दिनों से राजधानी भोपाल स्थित उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के बाहर धरने पर बैठे हैं। बुधवार को मंत्री परमार ने प्रदर्शनकारियों के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया था। इस मुलाकात के दौरान अतिथि विद्वानों ने मांग रखी कि जब तक प्रदेश में हरियाणा मॉडल लागू नहीं हो जाता, तब तक 'फॉलन आउट' प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
हालांकि, मंत्री ने स्पष्ट रूप से इसे संभव बताने से इनकार कर दिया। इसके बाद अतिथि विद्वानों ने मंत्री की बात को एक चुनौती के रूप में लिया और लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बीच अपनी बात रखने के लिए नए राजनीतिक विकल्प (वीजेपी) की नींव रख दी। उनका कहना है कि इस 'फॉलेन आउट' प्रक्रिया की वजह से प्रदेश के सैकड़ों अतिथि विद्वान अचानक बेरोजगार हो गए हैं।
बुधवार को ही अपने आंदोलन को तेज करते हुए करीब 200 अतिथि विद्वानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला भी रोक लिया। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व सीएम को 11 सितंबर 2023 का वह आश्वासन याद दिलाया, जिसमें उन्होंने फॉलन आउट की प्रक्रिया रोकने का वादा किया था। अतिथि विद्वानों ने उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा है।
आंदोलनकारी अतिथि विद्वान मुख्य रूप से दो सूत्रीय मांगों पर अड़े हुए हैं:
निश्चित समयावधि तय हो: नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने की एक स्पष्ट और निश्चित समय-सीमा (टाइमफ्रेम) तय की जाए।
प्रक्रिया पर लगे रोक: जब तक नियमितीकरण की यह नई नीति लागू नहीं हो जाती, तब तक 'फॉलन आउट' प्रक्रिया को पूरी तरह से बंद रखा जाए, ताकि कोई और विद्वान बेरोजगार न हो।
सरकार के सख्त रवैये और अतिथि विद्वानों के इस नए राजनीतिक दांव के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इस बढ़ते आक्रोश से कैसे निपटती है। फिलहाल बंगले के बाहर उनका धरना बदस्तूर जारी है।