Highlights:
मुख्यमंत्री ने विजयादशमी को सत्य, न्याय और राष्ट्र निर्माण का प्रतीक बताया।
शस्त्र-पूजन के जरिए शक्ति के विवेकपूर्ण और जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया।
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य और सैनिकों के बलिदान को याद किया।
महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं के अवसर और किसानों की समृद्धि को सुशासन का लक्ष्य बताया।
रावण दहन के साथ अहंकार, लोभ और भेदभाव छोड़कर सामाजिक एकता मजबूत करने का आह्वान किया।
CM Mohan Yadav Vijayadashami Message : मुख्यमंत्री ने विजयादशमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को संदेश देते हुए कहा कि यह पर्व सत्य की शक्ति, न्याय की स्थापना और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। विजयादशमी हमें विश्वास दिलाती है कि अन्याय कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ खड़े होने का संकल्प हमेशा बड़ा होता है।
भगवान श्रीराम की विजय इसी विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अपने भीतर की बुराइयों को त्यागकर राष्ट्र निर्माण और सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा का महत्व बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में शक्ति की आराधना का उद्देश्य लोकमंगल और जनकल्याण रहा है। भगवान श्रीराम का धनुष पीड़ितों के लिए आश्वासन और अत्याचारियों के लिए चेतावनी का प्रतीक है। शस्त्र-पूजन हमें सिखाता है कि शक्ति का इस्तेमाल विवेक और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। हमारा बल निर्बलों की रक्षा करे और पराक्रम मानवता के कल्याण के लिए समर्पित हो।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सुरक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प का उल्लेख करते हुए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवादी ढांचों के खिलाफ सटीक कार्रवाई कर अपने साहस, कौशल और सैन्य दक्षता का परिचय दिया। उन्होंने सीमाओं पर तैनात सैनिकों के त्याग और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि सैनिकों और उनके परिवारों के योगदान से ही देशवासी शांति और सुरक्षा के बीच त्योहार मना पाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार के सुशासन के प्रयासों में नागरिकों का सम्मान, सुरक्षा और कल्याण सर्वोपरि है। सरकार का संकल्प है कि माताओं-बहनों को निर्भय वातावरण मिले, युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के अवसर मिलें और किसानों के परिश्रम को समृद्धि में बदला जा सके। इसके साथ ही समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े जरूरतमंद व्यक्ति तक शासन का सहयोग पहुंचे और उसे समय पर न्याय मिले। मुख्यमंत्री के मुताबिक, ऐसे प्रयासों से ही लोकजीवन में रामराज्य की भावना को साकार किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने विजयादशमी को आत्मचिंतन का अवसर बताते हुए कहा कि रावण दहन के साथ लोगों को अपने भीतर के अहंकार, लोभ, भेदभाव और कर्तव्य के प्रति उदासीनता का भी त्याग करना चाहिए। ईमानदारी, सद्भाव और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने समाज की एकता मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि इन मूल्यों को अपनाकर ही भारत को अजेय और सशक्त राष्ट्र बनाया जा सकता है।