Highlights:
भोपाल में कांग्रेस कार्यालय के बाहर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आमने-सामने आए।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की, लेकिन हालात तनावपूर्ण हो गए।
भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।
कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घायल होने की सूचना है; आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की तैयारी और भीड़ प्रबंधन पर सवाल उठे।
Bhopal BJP Protest Water Cannon : भोपाल में सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने से तनाव की स्थिति बन गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान के विरोध में भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने पहुंचे थे।
प्रदर्शन के दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घायल होने की सूचना है।
भाजपा कार्यकर्ता रेडक्रॉस चौराहे से पैदल मार्च करते हुए प्रदेश कांग्रेस कार्यालय की ओर बढ़े। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी, लेकिन कार्यकर्ता आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। इस दौरान कुछ भाजपा कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़ गए। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और भगवानदास सबनानी भी बैरिकेड पर चढ़े। दूसरी ओर, कांग्रेस कार्यकर्ता भी कार्यालय के बाहर जुटे हुए थे। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन चलाया। इस दौरान किसान कांग्रेस के नीमच जिला अध्यक्ष बालकिशन धाकड़ समेत कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं के चोटिल होने की सूचना सामने आई है। एक कांग्रेस कार्यकर्ता का सिर फूटने की भी खबर है। हालांकि, घायलों की कुल संख्या, चोटों की गंभीरता और उपचार को लेकर आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि कार्रवाई के दौरान कितने लोग घायल हुए और उन्हें किस तरह की चोटें आईं।
भाजपा ने कांग्रेस कार्यालय के घेराव का कार्यक्रम बनाया था। ऐसे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध में जुटने की आशंका को देखते हुए पुलिस के सामने दोनों पक्षों को अलग रखने की चुनौती थी। इसके बावजूद दोनों दलों के कार्यकर्ता एक ही जगह आमने-सामने आ गए और स्थिति को संभालने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। घटनाक्रम के बाद पुलिस की तैयारी और प्रदर्शन स्थल पर भीड़ प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
28 सितंबर को भोपाल में निर्वाचन आयोग के घेराव के दौरान भी कांग्रेस कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़ गए थे। उस समय भी पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था और कई कार्यकर्ताओं के घायल होने की खबर सामने आई थी। ऐसे में सवाल है कि पहले के घटनाक्रम से सबक लेते हुए इस बार ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई, जिससे दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आने से बचते और स्थिति को तनावपूर्ण होने से रोका जा सकता।
भोपाल के इस घटनाक्रम ने राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की तैयारी, बैरिकेडिंग और भीड़ को नियंत्रित करने की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। जब दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आए, तो स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम थे? वाटर कैनन चलाने के बाद घायल हुए कार्यकर्ताओं की स्थिति और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जानकारी भी सामने आना बाकी है। अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में पुलिस की व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।