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‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के टेंडर में अनियमितताओं का आरोप लगाकर कांग्रेस ने CBI जांच की मांग की।
कांग्रेस महासचिव अमित शर्मा ने 4.18 करोड़ रुपये के मुख्य टेंडर और प्रस्ताव प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
कार्यक्रम का कुल खर्च 10 से 18 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई गई, जिसकी पुष्टि होना बाकी है।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों की भूमिका की जांच और भुगतान से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग।
Aashirwad Ka Diya Tender Controversy : मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर उज्जैन में आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ दीपोत्सव कार्यक्रम के टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के महासचिव अमित शर्मा ने पर्यटन विभाग की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मामले की CBI जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस महासचिव ने लगाए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
अमित शर्मा के मुताबिक, 16 सितंबर को पर्यटन विभाग ने दोपहर 3:46 बजे ईमेल के माध्यम से कंपनियों को टेंडर जारी किया था। प्रस्ताव जमा करने के लिए शाम 5 बजे तक का समय दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी कम समय-सीमा में कंपनियों के लिए प्रस्ताव तैयार करना और जमा करना मुश्किल था। शर्मा का दावा है कि निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी प्रक्रिया जारी रही और उसी रात अहमदाबाद की कंपनी ‘गो बनाना’ को काम आवंटित करने का आदेश जारी कर दिया गया। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
मध्य प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कार्यक्रम के टेंडर की लागत को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार, मुख्य टेंडर की राशि लगभग 4.18 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि दिल्ली की कंपनी ‘दीपाली डिजाइन’ की ओर से लगभग 8.18 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिए जाने की बात सामने आई है। अमित शर्मा ने पूछा कि उज्जैन में दीपोत्सव के दौरान दीपक जलाने के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च किए जाने के दावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने प्रति दीपक लागत का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
अमित शर्मा ने आशंका जताई कि कार्यक्रम का कुल खर्च बढ़कर 10 से 18 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक खर्च, पूरक बिलों और भुगतान की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कार्यक्रम पर कुल कितनी राशि खर्च हुई। कांग्रेस नेता ने पूरे मामले का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी उठाई है। हालांकि, खर्च से संबंधित इन आंकड़ों और आशंकाओं की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
कांग्रेस ने पर्यटन विभाग के अधिकारियों देवेंद्र राय और राहुल अर्गल की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। अमित शर्मा ने यह सवाल भी उठाया कि मध्य प्रदेश में स्थानीय युवा, स्टार्टअप और इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां मौजूद होने के बावजूद दूसरे राज्यों की कंपनियों को काम देने के लिए किन मानदंडों का पालन किया गया। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में स्थानीय कंपनियों को समान अवसर देने की जरूरत बताई।
अमित शर्मा ने ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के टेंडर और भुगतान की पूरी प्रक्रिया की CBI जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस चाहती है कि टेंडर जारी करने, प्रस्ताव प्राप्त करने, मूल्यांकन और कार्यादेश से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच, वास्तविक खर्च और पूरक बिलों का विस्तृत ऑडिट तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। कांग्रेस ने सरकारी आयोजनों में मध्य प्रदेश की स्थानीय कंपनियों और युवाओं को पारदर्शी तरीके से अवसर देने की भी मांग उठाई है।