आंवले के पेड़ की पूजा (सौ. डिजाइन फोटो) 
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अक्षय नवमी के दिन क्यों करते हैं आंवला के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन, जानिए इसकी वजह

आंवला नवमी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ ही परंपरा के अनुसार आज आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने के नियम होते है।

दीपिका पाल

Akshaya Navami 2024: आज सभी व्रत और त्योहार की तिथियों में से एक अक्षय नवमी यानि आंवला नवमी मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा के साथ ही आंवले के पेड़ को भी पूजा जाता है। पूजा करने के साथ ही परंपरा के अनुसार आज आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने के नियम होते है। कहते है देवउठनी एकादशी से पहले मनाई जा रही यह तिथि हर किसी के घर में धन, संपत्ति, यश और वैभव लेकर आती है इसलिए इस दिन पूजन का महत्व होती है। चलिए जानते हैं आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन करने की वजह।

क्या है अक्षय नवमी से जुड़ी मान्यता

यहां पर अक्षय नवमी से जुड़ी परंपरा के अनुसार कहा गया है कि, अक्षय नवमी के दिन अगर आप पूर्ण श्रद्धा के साथ आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं साथ ही इसके नीचे ही बैठकर भोजन करते हैं तो मनचाही इच्छा पूरी होती ह। आज अक्षय नवमी के दिन दान कार्य सही से करते हैं तो पुण्य कभी क्षय यानि खत्म नहीं होता है। इस दिन पूजा करने के साथ भोजन करने से मनचाही इच्छा भक्तों की पूरी होती है। आंवला पेड़ की पूजा का विधान होता है इतना ही नहीं इस वृक्ष के नीचे बैठने और भोजन करने से रोगों का नाश होता है।

जानें अक्षय नवमी से जुड़ी कथा

यहां पर अक्षय नवमी से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित होती है। कहते हैं कि, भगवान विष्णु ने कुष्मांडक दैत्य को मारा था, जिसके रोम से कुष्मांड-सीताफल की बेल निकली थी, इसीलिए इसे कुष्मांडक नवमी भी कहा जाता है। इसके अलावा प्रकृति की देन के प्रति कृतज्ञता और आभार जताने के लिए आंवला नवमी मनाई जाती है। यहां पर आंवला पूजन पर्यावरण की आवश्यकता और महत्व के प्रति जागरूक करने का कार्य करता है।

अक्षय नवमी पर क्यों बनाते है सात प्रकार की सब्जियां

यहां पर अक्षय नवमी के दिन भोजन बनाने को लेकर भी नियम होते हैं। आज अक्षय नवमी के दिन महिलाएं सात्विक भोजन बनाने की परंपरा निभाती है। इस अक्षय नवमी के दिन महिलाएं अपनी सब्जी में सात प्रकार की सब्जियों को मिलाकर बनाती है। इन सब्जियों का आज के दिन काफी महत्व होता हैं औऱ सात्विक भोजन बनाने के साथ ही पूजा करने के बाद ब्राम्हाणों को भोजन कराती है। इस दिन परिवार के सभी लोग आंवला के पेड़ के नीचे ही भोजन करते है।

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