रक्षाबंधन फोटो.एआई
लाइफस्टाइल

Raksha Bandhan 2026: कॉफी से लेकर इलायची तक, इस बार बाजार में आईं ये अनोखी राखियां

Unique Rakhi 2026: रक्षाबंधन पर पारंपरिक राखियों से अलग कई इको फ्रेंडली राखियां भी बाजार में मौजूद हैं। कॉफी, इलायची व बीज से बनी अनोखी राखियां ट्रेंड में हैं। जानें इस साल की खास राखियों के बारे में।

रीता राय सागर

Trending Rakhi Designs: इस बार रक्षाबंधन पर अगर आप भाई की कलाई पर कुछ अलग और कुछ ऐसा बांधना चाहती हैं, जो यादगार बन जाए, तो बाजार में पारंपरिक राखियों के साथ कई अनोखे और इको फ्रेंडली राखियां भी मौजूद हैं।

2026 के रक्षाबंधन में कॉफी की खुशबू वाली राखी से लेकर इलायची वाली मौली और बीज वाली राखी जो पौधे में बदल जाती है, जैसी राखियां भी मौजूद है। आइए जानते हैं इन नई तरह की राखियों के बारे में।

कॉफी वाली राखी

कॉफी प्रेमी भाई के लिए यह राखी काफी खास हो सकती है। कॉफी की खुशबू वाली माचा थ्रेड राखी पारंपरिक धागे से अलग अनुभव देती है। इसकी खासियत इसका अनोखा सुगंधित अंदाज है।

राखी

इलायची वाली राखी

इलायची की खुशबू वाली मौली राखी भी इस साल चर्चा में है। इसमें पारंपरिक मौली के साथ इलायची का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे राखी को भीगी-भीगी प्राकृतिक खुशबू मिलती है। यह पारंपरिक और अनोखे अंदाज का खूबसूरत मेल है।

पौधे में बदलने वाली राखी

पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए बाजार में बीजों वाली राखियां भी उपलब्ध है। ये प्लांटेबल राखियां बहुत पसंद की जा रही हैं। राखी का त्योहार खत्म होने के बाद इसे मिट्टी में लगाया जा सकता है। ऐसी राखियां त्योहार के साथ प्रकृति के लिए भी सुरक्षित हैं और एक अच्छा संदेश देती हैं।

राखी

बीज वाली जैविक राखी

प्राकृतिक पत्तियों और बीजों से बनी जैविक राखियां भी पसंद की जा रही है। ऐसी राखियों में प्लास्टिक का इस्तेमाल कम या फिर न के बराबर किया जाता है। रक्षाबंधन के बाद इन्हें प्रकृति के लिए उपयोगी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।

एआई से बनी पर्सनलाइज्ड राखी

नई एआई तकनीक का असर राखियों पर भी नजर आ रहा है। कटक और भुवनेश्वर के कारीगरों ने पारंपरिक राखियों को एआई के आधार पर पर्सनलाइज्ड डिजाइन के साथ नया रूप दिया है। यानी भाई की पसंद या व्यक्तिगत पहचान के हिसाब से राखी को खास बनाया जा सकता है।

राखी

हैंडमेड क्रोशिया राखी

हाथ से बनी क्रोशिया वाली राखियां भी इस साल पसंद की जा रही हैं। इनमें रंग, नाम और डिजाइन को व्यक्तिगत पसंद के अनुसार बनवाया जा सकता है। मशीन से बनी आम राखियों के बजाय हैंजमेड राखियों में अधिक पर्सनल फीलिंग होती है।  

जो खेले, वो खिले से मेजर ध्यानचंद तक, PM मोदी ने बताया कैसे बदलेगा भारत का स्पोर्ट्स इकोसिस्टम

9:05 को आया मैसेज, 9:14 पर टूटा संपर्क; नेपाल में ईशा फाउंडेशन के 80 कैलाश यात्री लापता, सद्गुरु ने मांगी मदद

राजस्थान HC विवाद पर CJI का बड़ा बयान, मीडिया ट्रायल से नहीं, संस्थागत जांच से तय होगा सच

Explainer: 65 करोड़ रुपये महीना किराया, फिर भी भारत ने क्यों लिया MQ-9B ड्रोन? जानिए इसकी खासियत और जरूरत

आंध्र प्रदेश के पलनाडू में भीषण हादसा, बस और ऑटो में जोरदार टक्कर में 7 लोगों की दर्दनाक मौत