Healthy Morning Habits: सुबह आंख खुलते ही अगर आप भी सबसे पहले फोन चलाते हैं, तो पूरा दिन सुस्ती से बीतने वाला है। इसके लिए फोन उठाना ही एकमात्र गलती नहीं है। बिस्तर छोड़ने के बाद की कुछ छोटी आदतें आपकी सुबह को सुस्त बनाती हैं। जानिए सुबह के शुरुआती मिनट कैसे बिताने चाहिए।
सुबह नींद खुलने के बाद शरीर और दिमाग को पूरी तरह एक्टिव होने में थोड़ा समय लगता है। इसे स्लीप इनर्शिया कहा जाता है। इसी वजह से कई लोगों को उठने के बाद कुछ देर तक सुस्ती, भारीपन या ध्यान लगाने में परेशानी महसूस होती है।
सुबह उठते ही नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया या ऑफिस के मैसेज देखने की आदत बहुत आम है। इससे दिन की शुरुआत अपने शरीर और जरूरत से पहले दूसरों के मैसेज से होती है। कोशिश करें कि उठने के तुरंत बाद फोन देखने की बजाय पहले खुद को पूरी तरह जगने का समय दें।
नींद खुलने के बाद कुछ मिनट आराम करना ठीक है, लेकिन लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से सुस्ती बनी रहती है। उठकर कमरे में थोड़ा चलना, स्ट्रेचिंग करना या रोजमर्रा की हल्की एक्सरसाइज शुरू कर देना चाहिए।
रातभर सोने के बाद शरीर को पानी की जरूरत होती है। इसलिए सुबह उठकर पानी पीना दिन की एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। हालांकि, एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने की जरूरत नहीं है।
सुबह कुछ समय धूप में बिताना शरीर के सर्केडियन रिदम यानी बॉडी क्लॉक के लिए मददगार होता है। इसलिए संभव हो तो पर्दे खोलें, बालकनी में जाएं या कुछ मिनट बाहर की रोशनी में रहें।
खासकर कामकाजी महिलाओं के लिए सुबह उठते ही बच्चों, ऑफिस, खाना और घर के कामों की पूरी लिस्ट दिमाग में चलने लगती है। इससे सुबह शुरू होने से पहले ही मानसिक दबाव महसूस होने लगता है। जरूरी कामों की छोटी सूची बनाएं और एक-एक करके पूरा करें।
हर दिन भारी एक्सरसाइज जरूरी नहीं है। कुछ मिनट की हल्की स्ट्रेचिंग, वॉक या सामान्य मूवमेंट शरीर को एक्टिव मोड में लाने में मदद करती है।
छुट्टी के दिन बहुत देर तक सोना और बाकी दिनों में जल्दी उठना नींद के रूटीन को बिगाड़ सकता है। कोशिश करें कि सोने और उठने का समय बहुत ज्यादा अलग न हो।
आंख खुलने के बाद तुरंत फोन पकड़ने की बजाय पहले पानी पिएं, पर्दे खोलकर धूप की रोशनी लें, कुछ मिनट हल्की गतिविधि करें और फिर दिन के जरूरी काम तय करें। सुबह की शुरुआत जितनी व्यवस्थित होगी, दिन उतना ही स्ट्रेस फ्री और एनर्जेटिक रहेगा।