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जानिए पितृपक्ष और दानवीर कर्ण से जुड़ी कथा, इस दिन से आरंभ हो रहा है 'श्राद्ध-पक्ष'

नवभारत डेस्क

-सीमा कुमारी

हिन्दू धर्म में 'पितृपक्ष' (Pitru Paksha) का बहुत ही अधिक महत्व है। इस साल पितृपक्ष 10 सितंबर से शुरू हो रहा है। शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष 16 दिनों के होते हैं। ये भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलते हैं। 'श्राद्ध-पक्ष' के इन 16 दिनों को पूर्वजों के किए उपकार को चुकाने के दिन माना जाता है।

मान्यता है कि, पितृपक्ष के दौरान पूर्वज धरती पर आते हैं और श्राद्ध व तर्पण के रूप में अपने वंशजों से भोजन और जल ग्रहण करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 16 दिनों तक चलने वाले  पितृ पक्ष (Pitru Paksha) की परंपरा कैसे शुरू हुई। पौराणिक कथा के अनुसार, इसका संबन्ध महाभारत काल के दानवीर कर्ण से माना जाता है। आइए जानें  इस बारे में -

पौराणिक कथा के अनुसार, श्राद्ध को लेकर महाभारत के योद्धा कर्ण के बारे में एक कथा प्रचलित है। जिसमें कहा गया है कि जब कर्ण की मृत्यु होने के बाद उनकी आत्मा स्वर्ग लोक में पहुंची तो वहां पर उन्हें भोजन में खाने के लिए ढ़ेर सारा सोना और सोने से बने आभूषण दिए गए। तब कर्ण की आत्मा को कुछ समझ में नहीं आया। तब कर्ण की आत्मा ने देवराज इंद्र से पूछा कि उन्हें खाने में सोने की चीजें क्यों दी जा रही है।

कर्ण के सवाल के जवाब में देवराज इंद्र ने बताया की तुमने अपने जीवन काल में सोना ही दान किया था। कभी भी अपने पूर्वजों को खाना की चीजों का दान उन्हें नहीं दिया इस कारण से तुम्हें भी सोना ही खाने को दिया गया। इस पर कर्ण ने कहा कि मुझे अपने पूर्वजों के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था इसलिए उन्हें कुछ भी दान नहीं कर पाया।

तब स्वर्ग से कर्ण को अपनी गलती सुधारने के लिए मौका दिया गया और उन्हें दोबारा 16 दिनों के लिए वापस पृथ्वी पर भेजा गया। इसके बाद 16 दिनों तक कर्ण ने अपने पूर्वजों को याद करते हुए उन्हें भोजन अर्पित किया। तब से इसी 16 दिनों को पितृ पक्ष कहा जाने लगा।

महत्व

पितृपक्ष में दान का बहुत महत्व है। मान्यता है कि, इस दौरान किए कए दान का फल जीवात्मा को स्वर्गलोक में प्राप्त होता है।  इस दौरान अपनी सामर्थ्य के अनुसार आप अनाज, वस्त्र, धन, मिष्ठान, सोना, चांदी आदि दान कर सकते है। साथ ही श्राद्ध पक्ष में इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि, यदि कोई भिक्षा मांगने आए तो उन्हें कभी खाली हाथ नहीं जाने देना चाहिए । माना जाता है कि इस समय हमारे पितर किसी भी रूप में धरती पर आ सकते हैं।

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