इंटरनेशनल फैमिली डे (सौ. सोशल मीडिया)  
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International Family Day: क्यों टूट रहे हैं संयुक्त परिवार? क्या प्राइवेसी की चाहत छीन रही है अपनों का साथ!

International Family Day: हर सुख-दुख में साथ निभाना, एक-दूसरे के लिए प्यार व सुरक्षा की भावना रखना ही परिवार के बंधन को मजबूत बनाता है। 15 मई को हम इसी फैमिली सपोर्ट सिस्टम को सेलिब्रेट करते हैं।

रीता राय सागर

Global Family Day: दुनिया भर में बढ़ते मॉर्डनाइजेशन ने संयुक्त परिवार के कॉन्सेप्ट को समाप्त कर दिया है। इसका कारण सीमित आय, आर्थिक असुरक्षा, बढ़ती महत्वाकांक्षा, बेरोजगारी और संसाधनों तक सीमित पहुंच भी इसका कारण है। इसके कारण रिश्तों से भावनाओं का विलोप हो रहा है।

पहली बार 15 मई 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया गया था। साल 2026 के लिए अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस का थीम ‘Families, Inequalities and Child Wellbeing’ यानी ‘परिवार, असमानताएं और बच्चों का कल्याण’ रखा गया है। आधुनिक समाज में परिवारों का विघटन तेजी से हो रहा है। ऐसे में परिवार एकजुट रहें और युवा परिवार के महत्‍व को समझें यही अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस मनाने की अहम वजह है।

क्या सोचती है आज की जेन जी जेनेरेशन

आज की पीढ़ी के लिए परिवार का मतलब माता-पिता-बच्चा तक ही सिमट गया है। उनके लिए कई नए कॉन्सेप्ट भी है, जैसे सिंगल पेरेंट्स, तलाकशुदा पेरेंट्स, अडॉप्टेड पेरेंट्स आदि। पहले परिवार का साइज 15-20 लोगों का होता था, अब 3-4 हो गया है। इससे बच्चों की परवरिश के साथ-साथ भावनाएं भी आहत हो रही हैं।

इंसानों के बदले पालतू जानवर बन रहे दोस्त

लगभग हर न्यूक्लियर फैमिली में एक पालतू जानवर दिख ही जाता है। ये बुरा नहीं हैं, लेकिन इंसानों के बदले में इसे लाया जाए, तो बुरा हो सकता है। कुत्ता, बिल्ली, बर्ड्स व फिश को आज के बच्चे न केवल पालते हैं, बल्कि वो उनमें ही अपना दोस्त, परिवार, भाई-बहन, इमोशन सब ढूंढ लेते है।

दादी-नानी की कहानियां बस कहानियों में

कोई मिलेनियल से पूछे कि वो गर्मी की छुट्टियों में कहां जाते हैं, तो वो बिना सोचे कहेंगे, नानी-दादी घर, लेकिन यही सवाल यदि किसी जेन जी या जेन एल्फा से पूछेंगे, तो वो शायद किसी हिल स्टेशन का नाम लेंगे। दादी-नानी ने भी इस पीढ़ी को अपना लिया है और उनके साथ कदम ताल मिलाकर चल रहे हैं।

गोपनीयता पहली पसंद

आधुनिक जमाने में गोपनीयता पहली प्राथमिकता है। प्राइवेसी न्यूक्लियर फैमिली की सबसे बड़ी वजह है। जहां परिवार बड़े होते थे, वहां कोई न कोई किसी न किसी बात पर रोकटोक करता था, जो आज की पीढ़ी के लिए बहुत बड़ी बात है। पर्सनल स्पेस, पर्सनल रूम, कंसेंट जैसी चीजें अधिक महत्व रखती हैं।

संयुक्त परिवारों का कम होने का असर बच्चों की परवरिश पर पड़ रहा है। आधुनिक जमाने में माता-पिता दोनों ही वर्किंग है, ऐसे में कई बार बच्चों को अकेला रहना पड़ता है, इससे बच्चों में भावनात्मक रिश्ते, पारिवारिक रिश्ते और अपनापन नहीं विकसित हो पाता है।

इस दौर में परिवार से जुड़ने के तरीके भी स्मार्ट होने चाहिए। छोटे-छोटे कदम से रिश्तों में आई इस दूरी को पाटा जा सकता है। इसके लिए एक-दूसरे के साथ भोजन करना, डिजिटल डिटॉक्स करना, साथ में कोई एक्टिविटी करना और खुली बातचीत को अहमियत देनी चाहिए।  इससे परिवार मजबूत और खुशहाल होगा।

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